बांगड़ूनामा

मिलन

नवंबर 18, 2017 कमल पंत

विधाता ने इत्तेफाक से दोनों को मिलवाया था,न कालोनी एक , न शहर एक , न राज्य न देश . एक बस ये देश था जो दोनों खुद का अपना कह सकते थे. दोनों में कोइ भी समानता नहीं थी. एक को जहाँ मिर्च वाला तीखा खाना पसंद था वहीं दुसरे को बिना मिर्च का हल्का खाना, एक जहाँ बहुत घरेलू टाईप का बच्चा था तो दूसरा आजाद पंछी . इसके अलावा हर चीज में दोनों एक दुसरे के अपोजिट. दुश्मन नहीं थे बस एक दुसरे के जैसे नहीं थे इसलिए किसी को कभी ये उम्मीद नहीं थी कि ये दोनों कभी मिलेंगे.

मजनू के टीले के एक रिफ्यूजी कैम्प में दोनों मिले थे. लड़का जहाँ बंगलादेश से आया हुआ हिन्दू था वहीं लडकी पाकिस्तान से आयी हिन्दू. धर्म दोनों के इत्तेफाक से एक थे मगर इबादत का तरीका अलग अलग था. रिफ्यूजी कैम्प में बहुत सख्ती चल रही थी, बाहर का माहौल भी ठीक नहीं था. कहने को इक्कीसवीं सदी थी मगर सोच का दायरा महारज मनु के जमाने का था. बाहर के माहौल में रिफ्यूजी को शरण देना या नहीं देना इस पर विचार चल रहा था. कुछ रिफ्यूजी ने तो रोजी रोटी के लिए सीपी में जाकर काम करना शुरू भी कर दिया था. लड़का भी उन रिफ्यूजियो के साथ सुबह सुबह सीपी निकल जाता. सीपी में जाकर चाईनीज माल बेचता और शाम को आकर पव्वा मारकर अपने साथियों के साथ एक झुग्गी में सो जाता. वहीं पाकिस्तान से आयी लडकी बहुत डरी सी रहती थी, अकेली थी और रोज नयी नयी बातें सुनती थी. जैसे रिफ्यूजी अकेली लड़कियों को कोठों में बेच देते हैं, उठा ले जाते हैं.उनसे धंधा करवाते हैं . ये सब बातें आस पास की औरतें जब भी करती लडकी के बदन में सिहरन उठ जाती.एक खौफ था जो उसे रोज घेर देता था. ज्यादा बड़ी नहीं थी बस 21 वां लगा था.और पाकिस्तान से भागते समय परिवार की लाश देख आयी थी.कहने को एक दादी थी उसकी मगर उसका भी कोइ भरोसा नहीं था कि कब चल बसे.

लड़का बंगलादेश से था,बंगाली कस्टमरों को जुबान से पहचान जाता और सीपी में लपक कर सिर्फ बंगला कस्टमरों के पास ही जाता.लड़के के परिवार का कोइ अता पता नहीं था. उसे जगह जगह घूमने का शौक था उसने अपनी सेल्समैनी को सीपी तक ही नहीं रखा था बल्कि वो सीआरपार्क ,क़ुतुब मीनार ,मंडी हाउस ,लाल किला ,हुमायूं का मकबरा ,हौज खास हर जगह जाकर अपने आईटम बेचने लग जाता .कहीं कहीं उसने झिडकी खाई ,कहीं मार और कहीं उसे थाने भी बंद किया गया मगर वापस आ गया.

दोनों की दुनिया अलग अलग थी लेकिन विधाता ने उनके मिलाने की एक तारीख तय की थी शायद. उस दिन मजनू के टीले में पत्थर बाजी हुई, दो समुदाय आपस में लड गए,उस समय लडकी दूध लेने बाजार आयी थी ,ये सब देखकर उसके हाथ पाँव फूल गए.किसी तरह अपने घर पहुँची.डर से काँप रही थी.लड़के ने भी पहली बार लडकी को तभी देखा था. पहले उसे लगा कोइ होगी लोकल की, मगर पाकिस्तानी रिफ्यूजी कैम्प में जाते देख उसकी दिलचस्पी लडकी में बड़ी ,वो पत्थरबाजी की आड़ लेकर लडकी के पीछे पीछे उसके घर पहुँच गया और उसकी दादी को बोला कि थोड़ी देर छिपने दे फिर भाग लेगा वह.

दादी ने मुसीबत में पड़ा समझ उसे जगह दे दी लेकिन लड़के के इरादे नेक नहीं थे.एक लड़का लडकी को देखकर जो सोचता है वही सारे ख्याल उसके मन में भी थे, बस शादी को छोड़कर.लड़के ने 3 4 घंटे उसी घर में बिताये इस बीच मुश्किल से एक बार लडकी ने अपने गर्दन ऊपर की होगी. लड़का आखिर में चला गया.

उसके बाद दोनों का कभी आमना सामना नहीं हुआ, मगर आगजनी की रात एक अनहोनी हो गयी. पाकिस्तानी रिफ्यूजी कैम्पों में अचानक कुछ गुंडे घुस आये और हंगामा काटने लग गए. लड़का उस रात चांदनी चौक से लौट रहा था.उसने देखा कि कुछ हॉकी डंडे लिए लोग झुग्गियों में घुसे हैं तो पीछे पीछे वो भी चला गया. लड़कों ने वहां हंगामा शुरू कर दिया.रिफ्यूजी कैम्पों में हुडदंग मच गया,अचानक एक झुग्गी से आग की लपटें उठने लगी और कुछ देर बाद दो तीन झुग्गियां इसकी चपेट में थी. दादी अपनी झुग्गी में घायल पड़ी थी और लडकी लगातार रोये जा रही थी. उन हाकी डंडे वाले लडकों में एक ने लडकी को अपनी ओर खींचा और वहां से भागने लगा.अजीब सी बैचेनी होने लगी बंगलादेशी लड़के के मन में . पीछा करूं ,न करूं ,बचाऊँ ?, न बचाऊँ ? इन सब सवालों के बीच उसने लडकी को न बचाने का फैसला किया और अपनी झुग्गी में वापस आ गया.

अगली सुबह पुलिस के सामने दादी रो रोकर अपनी बेटी का हुलिया बता रही थी. लडका सुबह सुबह ही चावडी बाजार की तरफ चला गया बेचने के लिए माल खरीदने.वो भूल चुका था जो पहले दिन रात हुआ था. यहाँ वैसे भी कोइ किसी की परवाह नहीं करता ,सबके अपने जीने के लाले हैं.

सुबह कूड़े के ढेर के पास उसने लडकी को बैठे देखा,वो रो रही थी.लड़के ने कुछ नहीं कहा ,न किया वो वहां से चला गया.दिन में सीपी में अपना सामान बेचा और रात को जीबी रोड के लिए निकल गया. मगर उसी कूड़े के ढेर के पास उसे लडकी नजर आ गयी. दारू का क्वाटर उसके अंदर उतर गया था,आँखों में वहशी पना था उसने लडकी को उठाया और उसके घर पहुंचाने का वादा करके अपने साथ ले आया.औटो करके वो मजनू के टीले पहुंचा तो ढीला पड़ गया अचानक.उसने लडकी को उसके घर जाने दिया और खुद वहीं जड़ सा खड़ा हो गया.जैसे सुधर गया हो अचानक.

अचानक चीख की आवाज आयी ,वो भागा और देखा दादी मरी पड़ी थी ,शायद हर्ट अटैक.या पोती का गम पता नहीं मगर जो भी था लडकी के लिए बुरा ही था,वो गंदे इरादे से फिर उस रात वहीं रुक गया मगर कुछ कर न पाया.

अगली सुबह दादी के क्रियाकर्म का सारा इंतजाम उसे खुद ही करना पड़ा. घर का सारा सामान लडकी ने लड़के के हवाला कर दिया. अब लड़के का नियम बन चुका था वो रोज गंदे इरादे लेकर लडकी के घर जाता मगर कुछ कर न पाता .आस पास की झुग्गियों से फुसफुसाहट होनी शुरू हो गयी थी, एक बुजुर्ग ने एक शाम लड़के को आकर कहा ‘बेटा शादी कर लो, इसका भी कोइ नहीं है. एसे आना जाना करोगे तो तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा मगर लोग इसे रंडी समझेंगे ‘

अचानक ये शब्द सुनकर लडके की रूह काँप गयी, उसने लडकी के पास जाकर सारी बात कह दी और दो अपोजिट नेचर के लोग एक हो गए. विधाता ने मिलाना था और क्या …………

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