बांगड़ूनामा

मैं हिंदुस्तान लिखूँ,पर तुम रेपिस्तान समझना !

अप्रैल 12, 2018 ओये बांगड़ू
लेखिका-रोशी सिंह

मैं हिंदुस्तान लिखूँ
पर तुम रेपिस्तान समझना !

मैं जन्म लूँ
तुम एक टक तकना
थोड़ा इंतज़ार करना
तब बलात्कार करना….

मैं हिंदुस्तान लिखूँ
पर तुम रेपिस्तान समझना !

मैं खेलने को निकलूं
तुम घात लगाए बैठे रहना.
मेरे इधर उधर होते ही,
मेरे मुहँ में कपड़ा ठूंसकर
साथ मुझे लेते चलना
थोड़ा इंतज़ार करना
तब बलात्कार करना..

मैं हिंदुस्तान लिखूँ
पर तुम रेपिस्तान समझना!

मैं पढ़ने को निकलूं
तुम मुझे पढ़ाकर छूतेे रहना
मैं इनकार करूँ
तो तुम मुहँ दबोचकर
मेरा जिस्म तार तार करना
इंतज़ार मत करना
बलात्कार करना…

मैं हिंदुस्तान लिखूँ
पर तुम रेपिस्तान समझना !

मैं घर में भी रह लूँ
पर तुम मुझे तब भी मत छोड़ना
एक टक ताकना मेरे वक्षस्थलों को
षडयंत्र रचना मुझे तबाह करने को
भूख को अपनी और बढ़ाना
और मेरा बलात्कार करना..

मैं हिंदुस्तान लिख भी दूँ मगर
तुम्हें रेपिस्तान ही समझना होगा !

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