यंगिस्तान

मस्जिदों-मन्दिरों की दुनिया में- निदा फ़ाज़ली

अक्टूबर 10, 2018 ओये बांगड़ू

निदा फ़ाज़ली हिंदी उर्दू लफ़्ज़ों की दुनियां में एक ऐसा नाम था जिनकी कलम से निकले हर शब्द ने अवाम के दिलों में जगह बनाई. सीधे-सादे शब्दों में लिखने वाले निदा फ़ाज़ली ने कई फिल्मों में गीत लिखने से लेकर शायरी और गजलों का भी एक अनमोल खजाना लिखा. निदा ने सच का साथ कभी नहीं छोड़ा और यह ही कारण था की उन्हें कई बार विरोध भी झेलना पड़ा. आज के माहौल पर उनका कहना था, ‘आज जो कुर्सी पर हैं उन्हें साहित्य से डर लगता है, क्योंकि साहित्य गालिब की तरह सवाल करता है… मुशायरों और कवि सम्मेलनों में भी अब सांप्रदायिकता हावी हो रही है, सच बोलने वालों का हश्र दाभोलकर, कलबुर्गी और असलम ताहिर जैसा होता है.’ तो आज पढ़िए उनकी लिखी रचना  ‘मस्जिदों-मन्दिरों की दुनिया में’

 

मस्जिदों-मन्दिरों की दुनिया में

मुझको पहचानते कहाँ हैं लोग

रोज़ मैं चांद बन के आता हूँ

दिन में सूरज सा जगमगाता हूँ

खनखनाता हूँ माँ के गहनों में

हँसता रहता हूँ छुप के बहनों में

मैं ही मज़दूर के पसीने में

मैं ही बरसात के महीने में

मेरी तस्वीर आँख का आँसू

मेरी तहरीर जिस्म का जादू

मस्जिदों-मन्दिरों की दुनिया में

मुझको पहचानते नहीं जब लोग

मैं ज़मीनों को बे-ज़िया करके

आसमानों में लौट जाता हूँ

मैं ख़ुदा बन के क़हर ढाता हूँ

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