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मंदिर वहीं बनायेंगे

दिसंबर 6, 2017 कमल पंत

आज से करीब 25 साल पहले देश में एक एसी घटना हुई जिससे देश का माहौल खराब होता चला गया,बाबरी ध्वंश को एक एसी अराजक घटना के रूप में हमेशा याद किया जाएगा जिसके कारण यूपी के साथ साथ देश भर में आपसी भाईचारे से रह रहे हिन्दू मुस्लिम समुदायों के बीच एक खाई आ गयी. आज भी राम जन्मभूमि आन्दोलन का नाम देश का पढ़ा लिखा वर्ग एक एसे रूप में लेता है जिसके कारण अराजकता बडती चली गयी.एक फिजूल का राजनितिक स्टंट कितना बुरा हो सकता है इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये रामजन्मभूमि आन्दोलन है जिसके नाम पर आज भी राजनितिक पार्टियाँ वोट बटोर रही हैं.

दोनों समुदाय के सिर्फ कुछ लोग इसके लिए आपस में लड़ रहे हैं और शांती खराब हो रही है शेष शांती से रह रही जनता की,चुनाव आते ही ये बाबरी का भूत बाहर निकल आता है और कुछ न कुछ एसा हो जाता है जिससे तनाव उत्पन्न हो और उस तनाव का फायदा ले उड़ते हैं राजनेता क्योंकि भारतीय जनता को धर्म के नाम पर आसानी से इमोशनल किया जा सकता है.अपने राजनितिक करियर में नेता कुछ और सीखे ना सीखे ये जरूर सीख लेता है कि जनता को किस प्रकार इमोशनल किया जाए. एक इमोशनल वोटर हमेशा उस ओर वोट कर आता है जिधर उसका इमोशन सटिसफाई होता हो.

खैर बाबरी ध्वंस का इतना सा इतिहास है कि 1528 में बनी बाबरी मस्जिद को कुछ कारसेवकों और कुछ प्रोफेशनल मजदूरों ने आज से 25 साल पहले 6 दिसम्बर 1992 को लाखों की संख्या में एक संगठन के कहने पर गिरा दिया.इसकी बकायदा प्रेक्टिस भी की गयी जिसके बारे में समय समय पर अलग अलग पत्रकारों ने बहुत कुछ लिखा है.

मगर इन 25 सालों में और क्या हुआ ?

इस घटना की जांच करने लिए गठित किया लिब्राहन आयोग अब तक सबसे लम्बा चला आयोग रहा,इसकी जांच में भी बहुत दिक्कतें आयी,लगभग 48 बार इस आयोग ने अपने समय को आगे बडाने की मंजूरी माँगी और जून 2009 में जाकर तात्कालिक पीएम पीएम मनमोहन सिंह को अपना कच्चा चिट्ठा सौंपा. मतलब आप समझ सकते हो कि जांच में कितनी तहों में घुसना पड़ा होगा आयोग को या हो सकता है ऊपर से प्रेशर जबर्दस्त हो . वैसे जांच के बाद भी कुछ ख़ास बाहर नहीं आया.

एक इम्पोर्टेंट बात बस सामने आयी जिसे लेकर कोर्ट ने भी एक फैसला सुनाया कि जहाँ ढांचा था वहां कोइ मूर्ती वूर्ती नहीं थी सब रात में रखी गयी थी. मगर देश में माहौल तो हिन्दू मुस्लिम बन चुका था एसे में कहाँ कुछ होने वाला था,वैसे एक फैसला 2013 में भी आया जब 3 जजों की एक बेंच ने भूमि को तीन हिस्सों में बाँट दिया. लेकिन कुछ लोग कहाँ मानने वाले थे फिर पहुँच गए कोर्ट.

उस दौरान छूट भैया नेता कहते पाए जाते थे कि ‘कोर्ट हमारे हक में देगा तो ठीक वरना कौन मानता इस कोर्ट को ,मन्दिर वहीं बनायेंगे’

ये मंदिर वहीं बनायेंगे वाला नारा तो इतना हिट हुआ कि पूछिए मत हर कोइ इस मामले में बस एक बात कहता मन्दिर वहीं बनायेंगे.

आज सिब्बल साब भी बोल दिए कि 2019 तक रुक जाओ तो मोदी जी गुजरात में कह आये देख लो भई अब कांग्रेस राजनीती कर रही है. गलत कहाँ कुछ है ,इस राम मन्दिर ने एक जमाने में भाजपा की नैया पार की तो हो सकता है अब कांग्रेस की कर दे .

 

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