यंगिस्तान

अथ श्री बीटेक(ब्वाय) कथा महात्म्य

अक्टूबर 5, 2016 कमल पंत

यहाँ दिए जा रहे लड़के के वर्णन को सभी बीटेक/नान बीटेक छात्र अपने पर न लें, ये डायरी में आई लव यू लिखने वालों की कथा है. ये तब की कथा है जब मोबाईल मेसेज की जगह चिट्ठी थी और दिल की भडास निकालने की जगह पर्सनल डायरी. ये उनके लिए है जिनके साथ हुआ था. बाकी लड़के का नाम अपने अपने हिसाब से रख लें.अपने दोस्तों को बोलें देख बे तेरी कहानी पब्लिश कर रहा है कमल . जिसको पसंद आये वो शेयर करे जिसे न आये हम समझ जायेंगे उसकी ही स्टोरी लिखी गयी है.

तो ये ‘लड़का’ एक ऐसे इलाके में पैदा हुआ, जहाँ प्यार होने को बच्चे का बिगड़ना माना जाता था, लड़की के साथ घूमने को करियर चौपट समझा जाता था और रेस्टोरेंट में बैठा दिख गया तो समझो उसने पूरी जिंदगी माँ बाप की छाती में मूंग दलनी हैं।

अब लड़के का परिचय, तो हमारा लड़का उसी एरिया के ठीक ठाक साहब के यहाँ पैदा हुआ,  साहब को किताबों का शौक था . 8 वीं क्लास में बालक को जबरदस्त वाला प्यार हो गया, पढता बॉयज स्कूल में और प्यार हुआ बगल के गर्ल्स स्कूल की नयी अडॉक में नियुक्त टीचर से। हिंदी की टीचर से उसने अपना ट्यूशन लगवा लिया और रोज मैडम के लिए कैडबरी ले जाने लगा।
“मुझे लगता है मुझे प्यार होने लगा है” इस टाइप के शब्द अपनी नई एलआईसी वाली डायरी में लिखने लगा। पापा को लगता बेटे को डायरी का शौक लग गया है । बस वह भी खुश। नौंवी तक पहुँचते पहुँचते उसने दो डायरी अखबारों की शायरी और वाट्सअप की शायरी से भर डाली। हर शायरी के नीचे लिखता “तुम्हारे बिना कैसे जी पाऊंगा” “तुम्हारे लिए जान दे दूंगा” ।
एक दिन पापा ने डायरी पढ़ ली और बेटे का ट्रांसफर दुसरे शहर के बोर्डिंग स्कूल में करवा दिया। जूते लात या थप्पड़ कितने पड़े इसका कोइ सही सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन सांवला सा लड़का गालों में लाली लिए खड़े बालों की हेयर स्टाइल के साथ लंगड़ा कर चल रहा था ये देखा गया।
खैर दुसरे शहर में एक साल तक तो वो ख्यालों में ही प्यार करता रहा फिर 11 वीं में आते ही उसे एक और प्यार हो गया। इस बार उसने एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया और डायरी में कोडवर्ड में लिखने लगा “तुम्हे मिलकर जाना कि सच्चा प्यार का होता है” डायरी के बाहर स्पष्ट शब्दों में लिखा था डायरी ना खोलें और अंदर पहले पन्ने पर श्रीगणेशाय नमः के बाद लिखा था “दुसरे की डायरी पढ़ना बेड मैनर” दुसरे पन्नें में मैथ्स की इक़्वेशन थी और तीसरे में वही “तुम ना मिली तो मर जाऊंगा” “तुमसे कहने को डर लगता है, तुम पास आती हो तो दिल धड़कता है”।
कुल मिलाकर ये वाला प्यार दोस्ती का हाथ बढ़ाने तक बढ़ गया। मगर तब तक एक एडवांस शहर के एडवांस लड़के ने लड़की को प्रोपोज कर दिया और हमारा लड़का दो दिन तक डायरी के पन्ने जलाता रहा।
खैर इससे एक फायदा हुआ कि उसका इंजिनियरिंग का एक्साम पास हो गया और वह दूर किसी शहर में बी टेक करने लगा। यहाँ चार साल में उसे दो से तीन प्यार हुए । मगर अब वह डायरी में नहीं लिखता था सीधा बोल देता था। रिजेक्ट होने पर गम में दारू पीता और लड़की के हाँ कहने पर खुशी में दारू पीता। चार साल के बाद जॉब में भी उसे एक दो प्यार हुए। मगर परवान चढ़ सके एसा प्यार उसे कभी नहीं हुआ।
आजकल वह फेसबुक में अपने सभी पुराने प्यारों के लिए शायरी लिखता था। तभी उसके पापा ने फेसबुक में पढ़ लिया उनका भी पुराना एक्सपीरियंस जाग गया और उन्होंने तुरन्त लड़के को घर वापस बुला लिया। घर में लड़के के लिए लड़की खोजी जाने लगी। उसके सभी पुराने प्यार अब अपने छोटे छोटे प्यारों के साथ घूम रहे थे।वह उन छोटे प्यारों का मामा कहलाये जाने लगा था।

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