बांगड़ूनामा

उर्स-ए-पिथौरागढ़

दिसंबर 19, 2017 Girish Lohni

गैंग्स ऑफ टैक्सी

ये कहानी भारत के छोटे से राज्य उत्तराखंड के पिथौरागढ कस्बे की है. कहानी उस दौर की है जब पिथौरागढ़ उत्तर प्रदेश राज्य का हिस्सा हुआ करता था. ज़माना वो ज़माना है जब देश में लिब्रलाईजेशन और प्राइवटाईजेसन के संभोग से ग्लोबलाईजेशन का बीज तैयार किया जा रहा था और पिथौरागढ़ में रोजगार के सबसे बड़े मेग्नेसाईड फेक्ट्री रूपी पेड़ को धरासाई किया जा चुका था.

बेरोजगारी के आलम ने कस्बे में बाजार के लालाओं को हिसाब के साथ गिनती कर सामन ढ़ोने वाले नए सस्ते मजदूर दिए. जिससे डूटयालों की मांग मुख्य कस्बे में अचानक से कम हो गयी. चंडाक के डाणों में मेग्नेसाईड फेक्ट्री के भरोसे खुली दूकान और होटल अब उजड़ चुके थे. ऐसे में हल्द्वानी और टनकपुर लाईन पर टैक्सी का धंधा कस्बे के धन्ना सेठों को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी लगा.

उर्स-ए-पिथौरागढ़

इस जमाने में कस्बे में टैक्सी खरीदने की हैसियत केवल कुमौड़ और लुन्ठेडा गाँव के लोगों की थी. सोने का अंडा देने वाले टैक्सी के इस धंधे ने कस्बे में एक नये दौर की शुरुआत कर दी. आये दिन सुबह कस्बे के टैक्सी स्टेंड में ब्लेड वार होने लगे और अगले दिन अखबार के कहीं तीसरे चौथे पन्ने में कोने पर ख़बर बनने लगी पिथौरागढ़ में कुमौड़ गाँव के अमकना ने लुन्ठेडा गाँव के ढीमकना को चाकू से घायल किया. टैक्सी स्टेंड अब हर सुबह आठ बजे तक गोवा,गगन, यामू, दिलबाग और राजदरबार की पीक से लाल हो जाने लगा.

प्रियंका रोज सुबह आसमान के सूरज की किरणों से हल्के नारंगी होने से एक घड़ी पहले अपने घर से निकलती और टैक्सी स्टेंड के लाल होने से लगभग आधा घंटा पहले अपने घर पहुँच जाती. दूसरी ओर प्रदीप प्रियंका के घर पहुँचने और टैक्सी स्टेंड के लाल होने के ठीक बीच तक अपने फिजिक्स और केमेस्ट्री के ट्यूशन पूरे कर चुका होता था.

परदीप जोसी एक सरकारी इस्कूल मास्टर का बेटा तो प्रियंका मेहता सरकारी बीपीएल कार्ड धारक तीन मंजिले मकान के मालिक की बेटी. प्रदीप पढ़ने में हमेशा अव्वल, प्रियंका बाक्सिंग में. प्रदीप ने किताबों के सहारे बिना घाट का पुल पार किये ही विश्व के सात बड़े शहर देखने का सपना देख लिया था प्रियंका कस्बे के बाहर तीन बडे शहर देख आ चुकी थी.

कुल मिलाकर प्रियंका और प्रदीप दो अलग अलग ध्रुव थे. एक उत्तर तो दूजा दक्षिण था और जैसा की विज्ञान का नियम है एक दुसरे के विपरीत ग़ुण वाली वस्तुओं के बीच ही आकर्षण उत्तपन्न होता है.

जारी…

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