बांगड़ूनामा

उर्स-ए-पिथौरागढ़ 8

अप्रैल 10, 2018 Girish Lohni

कलौनी गुरु

सरिता पांडे, जिनका औरकूट नाम सरिता पांडे जोशी था. जोशी मासाप की सबसे बड़ी बेटी है और बडाबे के जूनियर हाईस्कूल में फिलहाल सरकारी टीचर है. कहा जाता है कि जोशी मासाप ने पहली दो बेटियों के जन्म के बाद पुत्र रत्न प्राप्ति के लिये विज्ञान का सहारा लिया. विज्ञान की मदद के लिये पहले लखनऊ और फिर बरेली के अस्पतालो की मदद ली गयी. लेकिन दोनों बार जोशी मासाप ठगी का शिकार हुये और दोनों बार उन्हें पुत्री ही प्राप्त हुई.

थक-हार कर जब जोशी मासाप ने पुत्री प्राप्ति के शोक में शराब की लत लगायी तो जोशी मासाप की घरवाली को कही से कुण्डली दोष निवारण वाले कलौनी गुरु की शरण का सुझाव मिला. लगातार चार बेटियों के बाद जोशी मासाप का स्थानीय ही नहीं राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय देवताओं से भी विश्वास उठ गया था. अतः उन्हें प्रस्ताव जमा नहीं.

जोशी मासाप की घरवाली स्वयं कलौनी गुरु के घर गयी. कलौनी गुरु के घर पर प्रवेश करते ही कमरे में कायदे से बिछी मुनस्यारी के दन और सात लोगों की भारी भीड़ के साथ कमरे के कोने-कोने में बसी साईकिल अगरबत्ती की ख़ुशबू ने जोशी मासाप की घरवाली को पक्का यकीन दिला दिया कि समस्या का निदान यहीं मिलेगा.

पहले दिन की भारी भीड़ के चलते सुबह सात बजे से नौ बजे तक कलौनी गुरु आधे ही लोगों की कुंडली का समाधान निकाल पाये. कलौनी गुरु की नया बाजार में ऊन की दुकान है. शादियों के सीजन में कलौनी गुरु वर-वधु के मुकुट से लेकर आचार्य को दिया जाने वाला जूता सब रखते हैं. पिथौरागढ़ के माने हुये ज्योतिष हुये. जो केवल सुबह सात से नौ और रविवार के दिन दोपहर बारह बजे तक ही कुंडली दोष निवारण करते थे.

ईधर जोशी मासाप की घरवाली ने जोशी मासाप के सामने कलौनी गुरु का महिमा मंडन करते हुये बताया कि एक बार एक फौजी का दो महिने की छुट्टी आते टैम बक्सा टनकपुर स्टेशन में चोरी हो गया. फौजी की नौकरी दाव पर लग गयी. उसके बक्से में उसका आई-डी फाई-डी सब हुआ. तब उसकी घरवाली ने कलौनी गुरु की सलाह पर वृहस्पति बार को बृत रख केले के पेड़ की पूजा की गई. फौजी की छुट्टी पूरी होने से एक हफ्ता पैले एक देशी उनके गांव आकर बक्सा पहुंचा गया.

जोशी मासाप की घरवाली अगले तीन दिन तक कलौनी गुरु के घर सुबह सात बजे पहुँच जाया करे पर भीड़ के कारण उसका नंबर हमेशा पांचवा छठा रहता. हां उसे रोज के कलौनी गुरु के चमत्कार के किस्से जरुर सुनने को मिलते. जिसे घर जाकर लगभग टुन्न अवस्था में घर लौटने वाले जोशी जी को पूरे जोश के साथ सुनाती.

एक बार की बात है हाईडिल के जेई बर्मा की पिथौरागढ़ में नई-नई पोस्टिंग हुई. तीन लड़कियों के बाद भी उन्हें लड़का नहीं हुआ. कलौनी गुरु की सलाह पर उनकी घरवाली ने एकादशी का वृत रखा और जेई साहब ने हर शनिवार कागज में विष्णु का नाम लिखकर आटे की छोटी-छोटी गोलियां मछलियो को खिलाना शुरु कर दिया. दो साल बाद बर्माजी के पीलीभीत वाले घर में घरवाली को लड़का हो गया.

जोशी मासाप टून्न अवस्था में होने के बावजूद इस चमत्कार से प्रभावित हुये बिना न रह सके और अगले ही रविवार घरवाली के साथ कुण्डली पकड़ चले दिये कलौनी गुरु के दरबार. जोशी मासाप स्वयं मुनस्यारी के दन और साईकिल अगरबती के काम्बीनेशन से प्रभावित हुये बिना ना रह सके. एकदम सादे कपड़े पहने कलौनी गुरु को पहली नजर में देखते हुये ही जोशी मासाप को लगा कि कलौनी गुरु को पहले कहीं देख चुके हैं.

अगले पैतालीश मिनट तक जोशी मासाप कलौनी गुरु को देखे फिर दन में अंगुली से अलग-अलग डिजाईन बनाकर दिमाग पर जोर डालें. तभी अचानक उनके दिमाग में एक नाम आया “ चुस्सी ”.

जारी..

इससे पहले प्रदीप कौन था कहाँ से आया था क्यों ये सब हुआ जैसे प्रश्न मन में आ रहे हो और आप इस श्रंखला से नए नए जुड़े हों तो ये रहा पिछ्ला अंक..

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