बांगड़ूनामा

उर्स-ए-पिथौरागढ़ 7

मार्च 27, 2018 Girish Lohni

उर्स ए पिथौरागढ़ मोह्ब्ब्त की वह दास्तान है जो एक शहर मे धीरे धीरे घट रही थी

ये कहानी मे अब तक क्या क्या हुआ ये अगर आपको जानना है तो इस लिंक पर क्लिक करना होगा 

उर्स-ए-पिथौरागढ़ 6

आज की कहानी ये रही .

पीली बारह इंची स्केल 

दोपहर तीन बजे घर पहुँचकर जोशी मासाप ने प्रदीप की मां के समक्ष शर्मा सर द्वारा सुनाये गये घंटाकरण प्रकरण के रिपीट टेलिकास्ट का अंत कुछ इन शब्दों के साथ किया गया

सब तेरे लाड़ प्यार ने बिगाड़ रखा है. साले को लात मारके निकाल दूंगा घर से. करेगा साला फिर वड्डा वाली जीब में डराईवरी.

तीन से चार बजे का समय जोशी मासाप के लिये जीवन के सबसे लम्बे समय की तरह गुजरा. हर पाँच मिनट बाद वो चायपत्ती खरीदने पर ईनाम में मिली घड़ी की ओर देखते और फिर अपने हाथ में पकड़ी लकड़ी की पीली नटराज की बारह इंच वाली स्केल से अपने घर की पोलो की मजबूत कुर्सी पर धीरे-धीरे मारते.

नटराज की पीली बारह इंच वाली स्केल इन दिनों अभिभावकों में खासी लोकप्रिय थी. एक बार एक बच्चे के लिये खरीदे जाने पर इसे अगले तीन बच्चों तक काम में लाया जा सकता था. लोकप्रियता का एक गुप्तकारण यह था कि यह स्केल बच्चों को कुटे जाने के काम भी आ जाती थी. छोटी शरारतो में सीधी स्केल से मारा जाता था गम्भीर गलतियों पर स्केल को खड़ा कर मारा जाता था.

इस बीच जोशी मासाप की घरवाली द्वारा घर पर मौजूद बेटी को घंटाकरण प्रकरण की संक्षिप्त जानकारी दे दी गयी थी. बेटी ने पापा के प्रलय को रोकने के लिये अदरक कूटना शुरु किया तो शर्माजी की घरवाली ने बेसन के घोल में प्याज और आलू काटना. अगले बीस मिनट में जोशीजी के सामने प्याज और आलू के पकौड़े के साथ अदरक वाली चाय पेश की गयी. शर्माजी द्वारा तेल की बर्बादी तुम लोगों से जाने के तंज के साथ पकौड़े सूतना शुरु किया गया.

गर्म अदरक की चाय की चौथी चुस्की और पाँच पकौड़े सुतने के बाद जोशी मासाप का पारा नीचे आया ही था कि घर के बाहर से पकौड़े की ख़ुशबू सूँघते प्रदीप ने सीधा ही पकौडों पर धावा बोला. जोशीजी ने चायपत्ती में फ्री मिली घड़ी की ओर गर्दन घुमाई जिसमें चार बजने में अभी भी पूरे पंद्रह मिनट बांकी थे. शर्माजी ने नियंत्रित आवाज में पूछा आज ईस्कूल से जल्दी भाग आया. पिता के आंतरिक मैग्मा से पूरी तरह अंजान प्रदीप ने हल्के अंदाज में उत्तर दिया

आपका स्कूल तो तेरह किमी दूर है और आपने घर आके दो पलेट पकौड़ी खा दि.

जोशी मासाप ने इधर-उधर अपना पीला नटराज वाला हथियार खोजा जिसे साजिशतन अब तक मॉ बेटी द्वारा जोशी मासाप की नजरों से दूर कर दिया गया था. जोशी मासाप ने अपने भीतर का सारा मैग्मा अपनी आँखों में भरकर अपने सपूत को अपनी लाल बड़ी आंखो के माध्यम से दिखाया. जिससे प्रदीप जान चुका था मामला कुछ गम्भीर है और उसका वहां से कटना ही बेहतर है.

मामले की गम्भीरता को देखते हुये पारिवारिक निर्णय यह हुआ कि आज प्रदीप ट्यूशन नहीं जायेगा. जोशी मासाप की घरवाली ने पूरी तरह से ऐहतियात रखते हुये अकेले में पूछताछ शुरु की और बेटी को जोशी मासाप के तापमान को नियंत्रित रखने के निर्देश दिये गये.

और कोई उपाय न देखकर प्रदीप ने मुक्के से लेकर मुलाकात तक की हर एक बात सच-सच बता दी. पूरी जानकारी मिलते ही जोशी मासाप की घरवाली पूरे आत्मविश्वास के साथ बाहर निकलते हुये पूरे जोर से कहने लगी

मैं जाणति थी की मेरा लड़का कर ही नि सकता ऐसा काम. ये आजकल लड़कियाँ ही तेज होती हैं. तुम ये सरमा-फरमा की बात सुनके मेरे बेटे पर बांज लगा रे हो.

जोशी मासाप घरवाली की आवाज की तीव्रता सुनकर समझ चुके थे उनका बेटा निर्दोष है और आगे का किसी भी प्रकार का सवाल घरवाली के भीतर देवी लाने को काफी था. इससे पहले की वो बात संभालने के लिये कुछ कहते दरवाजे पर खड़ी उनकी सबसे बड़ी ने आवाज दी पापा…

इससे पहले जोशी मासाप की सबसे बड़ी बेटी सरिता कुछ बोलती जोशी मासाप की घरवाली ने पूरी चिढ़ के साथ कहा

लो खबर बड्बे के इस्कूल तक भी पहुंच गयी. तुम मास्टर-मास्टरनी इस्कूल पढ़ाने जाते हो या गप्पें हाँकने…    

 

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