यंगिस्तान

तिरंगे से लिटमस टेस्ट

अगस्त 20, 2018 Girish Lohni

हम सभी ने बचपन में लिटमस पेपर टेस्ट पढ़ा होगा. लाल को नीला कर दे नीले को लाल. लिटमस टेस्ट से अम्ल और क्षार की पहचान हो जाती है. भारत में ऐसा ही देशभक्ति टेस्ट चला है. लिटमस पेपर के स्थान पर तिरंगे का प्रयोग किया जा रहा है. अगर आपने तिरंगे का सम्मान किया तो आप देशभक्त नहीं किया तो गद्दार. परेशानी तिरंगे के सम्मान में नहीं सम्मान की परिभाषा में है. यह तय कौन करेगा की किसे सम्मान कहा जायेगा या किसे अपमान?

अगर आपके वाहन पर लहराता तिरंगा आपको देशप्रेमी बना देता है तो अगले ही दिन हवा में उड़ किसी नाली में गिरा हुआ मिलता है या आपके किचन में भगोना उठाने वाला कपड़ा बन जाता है, वह आपको क्या बनाता है? हमारे घर ,मंदिर मस्जिद पर कौन सा झंडा लगेगा यह कौन तय करेगा?

मान लीजिये आप किसी व्यक्ति के घर पर जाते हैं और उसकी छत पर चढ़कर तिरंगा फहराना चाहते हैं. व्यक्ति प्रत्येक शाम तिरंगे को निकालकर नहीं संभाल सकता व्यक्ति को तिरंगे के रंग के धीमे होने पर तकलीफ होगी. इसलिये वह आपको बिना कुछ कहे अपनी छत पर तिरंगा फहराने की अनुमति नहीं देता है. आपके द्वारा जबरदस्ती करने पर वह व्यक्ति पूरे जोर से आप पर चीखता है और आपको लतिया कर आपके तिरंगे समेत घर के बाहर धकेलता है तो क्या यह तिरंगे का अपमान कहलाएगा?

आप जानना चाहते हैं कि व्यक्ति क्यों अपनी छत पर तिरंगा फहराना  नहीं चाहता लेकिन आप हैं कौन किसी से सवाल करने वाले? कोई क्यों बताये कि वह क्या क्यों कब करना चाहता है?

इस प्रकार का एक लिटमस पेपर टेस्ट राष्ट्रगान को लेकर भी किया जाता है. सड़क के किसी भी कोने पर एक आदमी स्पीकर में जन-गण-मन बजा देता है और आपके रुकने और ना रुकने पर आपकी देशभक्ति तय की जाती है. किसने अधिकार दिया कहीं भी राष्ट्रगान बजाने का? आप कहीं भी राष्ट्रगान बजाएं और सड़क चलते व्यक्ति के खड़े होने पर उसकी देशभक्ति की जांच करें यह कहाँ का नियम हुआ?

यदि देशभक्ति जांची जा सकने वाली या दिखायी जाने वाली चीज है तो सरकार को जल्द ही टीके जारी करने चाहिए जो आदमी के पैदा होते ही ठोके जाएं ताकि आदमी बड़ा होकर देशद्रोही ना बने.

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