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कोरे -एक अनोखी जनजाती

अगस्त 20, 2018 कमल पंत

केरला भारत के सुदूरवर्ती दक्षिण का इलाका है,बचपन में एक सवाल अक्सर आपके क्वेश्चन पेपर में आता होगा कि भारत के सबसे शिक्षित राज्य के बारे में बताओ और उसका आंसर होता था केरला. पूरे एक नम्बर का प्रश्न आता था,बड़े बड़े प्रतियोगी परीक्षाओं में तो शिक्षा की दर तक पूछ ली जाती थी और पूरे एक नम्बर मिलते थे. दक्षिण के राज्य केरल ने पूरे भारत के बच्चों को अपना नाम याद करने पर मजबूर कर दिया था सिर्फ इस वजह से क्योंकि वह भारत का सबसे शिक्षित राज्य था/है. इसलिए हम लोग को मुंहज़ुबानी याद हो गया था कि केरला सबसे शिक्षित है और भारत में है.फिलहाल केरला में बाढ़ आयी है और 350 से ज्यादा जानें चली गयी है.राहत और बचाव कार्य जारी है आप भी अपनी तरफ से योगदान दे सकते हैं सीएम और पीएम रीलीफ फंड में पैसे देकर.

मगर हमारे अतिरिक्त देश में कुछ और लोग भी रहते हैं, इन्हें अलग अलग  भाषा में अलग अलग तरह से पुकारा जाता है मगर किसी फिल्म में इनका नामकरण हुआ ‘चूतियम सल्फेट’ हालांकि इस पूरे शब्द का अर्थ क्या है वह सही सही नहीं पता लेकिन आगे की लाइन पढ़कर आप समझ जायेंगे कि आखिर रसायन विज्ञान का सा लगने वाला ये शब्द चूतियम सल्फेट आखिर है क्या. फिलहाल इस बड़े शब्द को हम आगे ‘कोरे’ कहकर पुकारेंगे क्योंकि चूतियम सल्फेट हर जगह कह पाना संभव नहीं है.

तो हमारे देश की ये प्रजाती ‘कोरे’ भारत के नार्थ इण्डिया में ज्यादा पायी जाती है, सोशल मीडिया के जंगलों में भटकने वाले ये आदिवासी भारत के सम्पूर्ण भूगोल से वाकिफ नहीं हैं,इन्हें जमीन के टुकड़े से तो बहुत लगाव रहता है लेकिन उस टुकड़े पर रहने वाले लोगों को ये पसंद नहीं करते. कोरे प्रजाती के लोगों की संख्या का निर्धारण ठीक ठीक नहीं किया जा सकता क्योंकि फेसबुक के अकूत जंगलों में ये कहाँ कहाँ पाए जाते हैं उसका ठीक ठीक सर्वे अभी तक हो नहीं पाया है.

कश्मीर में आयी बाढ़ के बाद जहाँ एक ओर शेष भारत उनकी मदद को आगे बढ़ रहा था वहीं कोरे प्रजाती के लोग अपने जंगल में चीख चीख कर कहे जा रहे थे कि ‘मरने दो सालों को क्या फर्क पड़ता है,धरती का बोझ कम होगा.’ इससे ये पता चलता है कि कोरे जनजाती के लोगों में इंसानियत नाम की चीज बहुत पहले ही खत्म हो गयी थी. खैर इस बार आयी केरला की बाढ़ के बाद फेसबुक के जंगल में कुछ दिन तो कोरे जनजाती के लोग कम नजर आए क्योंकि उन दिनों एक बड़ी हस्ती की मृत्यू के बाद वो लगातार उसी में व्यस्त थे,मगर एक दो दिन से कोरे जनजाती फिर से जंगलों में भौंकने लगी है. कोरे जनजाती के लोग कहते हैं कि ‘ये बीफ खाते हैं तभी बाढ़ आती है ‘  , एसे ही इसी जनजाती के अन्य सदस्य का कहना था कि ‘इन्हें ईशू अल्लाह बचाएगा छोड़ दो ‘. एक और कोरे जनजाती का मेम्बर कहता है कि ‘सबरीमाल मदिर में औरत घुसी इसलिए बाढ़ आ गयी ‘ .इसी तरह के कुछ अन्य कमेन्ट नीचे लिख रहा हूँ जो कोरे जनजाती के लोगों द्वारा जंगलों में कहे गए थे.

‘केरला में मदद क्या पहुंचाना,साले सब कम्यूनिष्ट हैं ‘

‘अच्छा हुआ बाढ़ आगयी धरती पर बोझ बढ़ रहा था ‘

‘मैं अपील करता हूँ कि मदद न की जाये ,ये सब देशद्रोही हैं’

‘केरला भारत में है क्या ?’

‘देखा केजरीवाल और कांग्रेसी मदद कर रहे हैं कम्यूनिष्टों का गढ़ है ‘

‘केरला को मदद करने से अच्छा गौशाला में दान कर दो,ये साला हमारी गाय खाते हैं’

‘अलाह ईशू पुकारते रहे मगर लास्ट में काम आये हमारे फ़ौजी ‘

कोरे प्रजाती एक अलग तरह की प्रजाती है इनके संवादों को दिल पर मत लीजियेगा ,ये जनजाती फेसबुक के जंगलों में ही विचरण करती है और इनकी बातों को कोइ सीरियसली नहीं लेता, वो तो रात का टाईम था कुछ और नही मिल रहा था इसलिए कोरों के ऊपर लिख दिया.

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