गंभीर अड्डा

सावित्रीबाई फुले: देश की पहली महिला टीचर, विद्रोही लेखिका

जनवरी 3, 2019 ओये बांगड़ू

सावित्री बाई फुले की आज जयंती है, भारत की वह नारी जिसने अछूतों के लिए, दलितों के लिये 170 साल पहले संघर्ष करना शुरू कर दिया था,पहली शिक्षिका कह लीजिए पहले कन्या स्कूल की शिक्षिका कहिए, शिक्षा के प्रति जागरुक पहली नारी कह लीजिए,मराठी कवियत्री, समाजसेविका कुल मिलाकर सावित्रीबाई फुले ने वह काम आजादी से कई साल पहले शुरु कर दिया जिसके बूते आज कई फर्जी एनजीओ पल रहे हैं.

मजाक के दूसरे तरफ आज 2019 में आपने कल ही सुना होगा कि सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के बाद कितना हंगामा हुआ, और आप सोचिये ऐसे माहौल में करीब 170 साल पहले सावित्री बाई फुले महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लड़ रही थी।

उस दौर में जब महिलाओं के लिए लगभग हर उस चीज में बैन था जो बाहर जाकर करनी होती थी। शिक्षा तो बस ये समझ लीजिए किस्मत वाली महिलाएं ही हासिल कर पाती थी। प्राथमिक स्कूल उंगली में गिनने लायक थे, कन्याओं के लिए स्कूल की कल्पना भी नही की गई थी। जब सावित्री बाई फुले ने अपने पति ज्योतिबा फुले की मदद से पहला स्कूल खोला।

3 जनवरी 1831 को जन्मी सावित्री बाई फुले का विवाह 1840 में ज्योतिबा फुले से हुआ, महात्मा ज्योतिबा को भारत के सुधार आंदोलनों के एक प्रमुख चेहरे के रूप में जाना जाता है,

ज्योतिराव जो बाद में महात्मा ज्योतिबा के नाम से जाने गए वह सावित्रीबाई के गुरु समर्थक संरक्षक सब कुछ थे.सावित्री बाई को इस कट्टर समाज मे जिस सहारे की जरूरत थी वह ज्योतिबा के रूप में उन्हें मिला, ज्योतिबा ने न सिर्फ गांव गांव जाकर महिलाओं को बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया बल्कि सावित्री बाई को भी मोरल स्पोर्ट दिया, जब स्कूल के रास्ते मे सावित्रीबाई पर कीचड़ फेंका गया,उन्हें तरह तरह से परेशान किया गया तब सावित्रीबाई को जिस मोरल स्पोर्ट की सख्त जरूरत थी वह ज्योतिबा के रूप में उन्हें मिला.

कहते हैं सावित्री बाई अपने थैले में दो साड़ियाँ लेकर चलती थी क्योंकि रास्ते मे उन पर कीचड़ गोबर गन्दगी फेंकी ही फेंकी जाती थी। उस हालत में उन्हें स्कूल जाकर दूसरी साड़ी बदलनी होती थी मगर वह किसी सिचुएशन से घबराए नही।

समाज सेवा ही सावित्रीबाई का मुख्य लक्ष्य था, जब लोग छुआछूत की बीमारियों से दूर भागते थे मगर सावित्रीबाई आगे बढ़कर मदद करने वाली थी। 1896-97 में ऐसे ही एक गांव में प्लेग पीड़ितों की सेवा करते हुए किसी बच्चे से उन्हें भी प्लेग हो गया। 10 मार्च को उनका प्लेग से निधन हो गया।

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