यंगिस्तान

किस पर करें भरोसा ?

मार्च 28, 2018 ओये बांगड़ू
आजकल चंकी महाराज सायबर एक्सपर्ट हो रखे हैं ,परसों ही नोकिया 1100 का पासवर्ड तोड़ना सीखे हैं इसलिए खुद को एक्सपर्ट आफ द एक्सपर्ट्स मान बैठे हैं,पूरे फेसबुक में जहाँ जहाँ ये साईबर शब्द से जुडी खबरें देखते हैं तुरंत ज्ञान पेलने चले जाते हैं,एक चार पांच सौ शब्दों का आर्टिकल रूपी कूडा यहाँ भी भेजा है,और सख्त हिदायद दी है कि पब्लिश होना ही चाहिए वरना शाम की चाय सिगरेट के साथ नही पिलायेंगे .

कैंब्रिज एनेलिटिका है क्या ? कैसे काम करती है ?क्या काम करती है ? ये सब जानना हो तो फेसबुक या गूगल में ये शब्द टाईप करो आपको डीटेल मिल जायेगी . मै ये सब यहाँ नहीं बताने वाला. इन्शार्ट बस इतना समझ लो कि ये कम्पनी में बैठे एक्सपर्ट बंदे पहले ये देखते हैं कि आप सोशल मीडिया में क्या लाईक करते हो क्या नहीं और उसके बाद अनुमान लगाते हैं कि आप पोलिटिकल रूप से क्या सोचते हो और उसके बाद आपकी सोच के हिसाब से ये लोग वैसा ही मेटर आपके सामने आपके फेसबुक में परोसते हैं.

मसलन आप जो है मोदी जी से नफरत करते हो,तो ये लोग पहले ये देखेंगे कि आपने एंटी मोदी कितनी पोस्ट लाईक की हैं ?किस तरह की पोस्ट लाईक की हैं? उसके बाद ये उसी तरह की पोस्ट के मुताबिक आपके पास सप्लाई भेजेंगे. अब लेकिन इसमें ये भी मायने रखता है कि ये काम किसके लिए कर रहे हैं अगर ये मोदी जी के लिए काम कर रहे हैं तो आईटी टीम द्वारा तैयार किये गए वो मेसेज आप तक पहुंचेंगे जिनमे मोदी जी के उन कामों की तारीफ़ होगी जिन कामों को आपने कभी न कभी फेसबुक में लाईक किया होगा. मसलन आपको शिक्षा पर किये जा रहे काम पसंद आते हैं तो आप तक लगातार वो पोस्ट पहुंचाई जायेंगी जिनमे मोदी जी शिक्षा सुधार पर बड़े बड़े दावे कर रहे होंगे या शिक्षा के ऊपर उनका काम दिखाया जाएगा. अब लगातार आपके सामने एक ही चीज आयेगी तो आप सोचने पर मजबूर हो जायेंगे कि कहीं मेरा विरोध गलत तो नहीं ?

आज सूचना मंत्री जी बोले की राहुल कैंब्रिज एनेलिटिका के पहले क्लाईंट थे  सबूत के तौर पर उन्होंने उस व्हिसल ब्लोवर का जिक्र      किया जिसने इस   पूरे मामले को उजागर किया है क्रिस्टोफर वाईली. लेकिन क्रिस्टोफर   वाईली की बात को अधूरा      बताते हुए कांग्रेस भी किसी और लेकर सामने आ गयी   जिसने बताया कि असली खेल तो भाजपा का रचा है.
अवनीश राय नाम के एक शख्स ने ही सबसे पहले इन कम्पनियों से सम्पर्क किया था 2009 में,दो तीन     जगह दिए   गए अपने इंटरव्यू में वह बताता है कि किस तरह कांग्रेस को क्लाईंट बनाने        उद्देश्य से ये कम्पनी भारत आयी और उस दौरान क्या क्या किया गया. 2013 से पहले ये कम्पनी कांग्रेस को क्लाईंट बनाने के लिए लालयित थी लेकिन उसी दौरान पता चला कि किसी अमेरिकी गुजराती महिला इनकी पहले से क्लाएंट थी जो    कांग्रेस के खिलाफ डाटा कलेक्ट कर रही थी, अब राय की     बात पर यकीन किया जाए तो असल            राय इस कम्पनी की सेवा कांग्रेस के लिए    लेना चाह रहे थे और कांग्रेस भी इंट्रेस्टेड थी लेकिन इसी दौरान कम्पनी पहले से किसी और क्लाईंट के काम के लिए भारत में थी ,कम्पनी यहाँ सिफ पैसे बनाने आयी थी उसे राजनितिक दलों से कोइ मतलब नहीं था .वह एंटी कांग्रेस डाटा कलेक्ट कर रही थी अपने किसी क्लाईंट के लिए.क्यों कर रही थी ये तो वो बतायेंगी नहीं . और कांग्रेस        उसके प्रोजेक्ट में इंट्रेस्टेड        होने के      बावजूद उसे काम नही दे रही थी. (डीटेल में जानने  लिए द प्रिंट में छपे अविनाश राय का इंटरव्यू पढ़ें )
हमारे देश में चुनाव के लिए राजनितिक पार्टियाँ किस हद तक गिर सकती हैं ये उसका एक उदाहरण भर   है.आपको    हमको    पता ही नहीं है कि पार्टियाँ सिर्फ हमे झूठे वादे नहीं देती उन        झूठे वादों का हम    पर क्या असर पड़ रहा है ये जान्ने के लिए एसी कम्पनियां भी हायर करती है.

हम किस पर करें भरोसा ,एक कमबख्त  फेसबुक था वो भी हमारे लाईक्स और पर्सनल डाटा बेच रहा है,सुना है ये कम्पनी उसी के यहाँ से सामान उठाते हैं.कितनी महान चेन है देखो हम फेसबुक को अपना दुखड़ा सुनाते हैं फेसबुक अपने सर्वर में रख लेता है वहां से केम्ब्रिज उठाती है और पोलिटिक्स बिहेवियर जैसी चीजों पर स्टडी करने लग जाती है वहां पहुँच जाते हैं हमारे नेता ये जान्ने के लिए कि हम क्या सोच रहे हैं..
अरे नेताओं क्यों खामखा इन कम्पनियों के पीछे पड़ते हो ,हमारी     फेसबुक पोस्ट पढ़ लिया करो खुद ही समझ जाओगे हम क्या सोचते हैं.

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