बांगड़ूनामा

खून सनी कुल्हाड़ी

अप्रैल 7, 2018 कमल पंत

बहुत पहले लोग कहा करते थे कि उसके घर देर है अंधेर नही, कोर्ट के मामले में भी ऐसा ही कहा जाने लगा, कहानी काल्पनिक है लेकिन कहानी का आधार एकदम सच्चा।
एक गांव में एक अकेले 45 साल के आदमी की शादी करा दी गई अपने से आधी उम्र की लड़की से, लड़की पूरी तरह बालिग भी नही हुई थी और आदमी टीबी की दहलीज पर था, शादी होने के एक साल के अंदर उसे टीबी हो गई और मर गया। सामन्य सी बात थी, मरना था ही उसे बस एक लड़की की जिंदगी खराब करके मरा ऐसा कहा जा सकता है मगर असल मे उस गरीब लड़की के लिए वह अच्छा खासा पैसा छोड़ गया।उसने  जाने क्या सोचकर उस लडकी से शादी की थी ,क्योंकि अपने मरने का एहसास उसे था ही शायद इसीलिए उसने लडकी को कभी हाथ नहीं लगाया    और मरने से पहले ही उसे स्कूल की    हेड मास्टरनी के हवाले कर गया,बोला ये बच्ची है इसकी हिफाजत की जिम्मेदारी तुम्हारी और बदले में दो खेत दे दिए उसे.अपना मर गया .
अब पैसा था आगे की जिंदगी थी और आगे पीछे कोई नही, ऐसे में समाज खुद को अक्सर मा बाप मानकर आगे आता है मदद करने। न चाहते हुए भी।कितना ही मना कर लो   गाँव वाले सोचते हैं कि बेचारे को शर्म लग रही तब मदद नहीं मांग रहा.और जब बेशरम होकर मदद मांगो तो उसे लगता कि कितना बेशरम होकर मांग रहा जरूर कुछ लोचा है.
उसके साथ भी वही हुआ, पति की बरसी पर सभी नाते रिश्तेदार सुझाव देने आ गए। कोइ कहता फलाना गांव में एक 50 साल का बुड्ढा है उससे कर ले, कोई कहता 4 बच्चों का विधवा बाप है उससे कर ले। कुल मिलाकर सब उसे रवाना करने को तैयार थे। मललब बरसी कराकर सीधे शादी .बड़ी मुश्किल से उनसे पिंड छुडाकर उसने अपने रिश्ते के देवर राम को कहा कि वह अपने लिए  लड़का खुद तलाश लेगी और जब लगेगा कि शादी करनी चाहिए तो कर लेगी वैसे भी 18 साल कोई बुढ़ापे की उम्र नही है।
दो तीन साल उसने गांव में यूंही अकेले गुजार दिए, विधवा बनकर नही बल्कि स्कूल में पढ़ने वाली लड़की बनकर, गांव वालों की नजर में चुभती थी बहुत लेकिन किसी की हिम्मत नही थी उसे कुछ कहने की।हेडमास्टरनी का फुल सपोर्ट था उसे,गाँव में एकदम छाती चौड़ी करके एसे घूमती थी जैसे गाँव की प्रधान हो.
इस बीच वो दो तीन लड़कों को पसन्द भी करने लगी (एक टाइम पर एक ही)।हेडमास्टरनी को बताती भी रहती कि कौनसा लड़का पसंद आया है और क्यों. और उनकी सलाह पर   लड़कों    टेस्ट भी ले लिया,सबके सब उसके पैसे जमीन या बदन के लालची निकले.जैसे लड़कों की नीयत पता चलती रही वो उनसे दूरी बनाती रही।
उधर उसके खेत गाँव का ही एक लड़का जोता करता था, सारी मेहनत उसकी और जमीन का किराया लडकी का.उसके खेतों में काम करने वाला भरत एकलौता ऐसा मर्द था जो पूरी ईमानदारी से उसका अनाज उसे दे जाता और गलत नियत से कभी नही देखता, बल्कि एक दो बार उसने गांव के शराबियों से उसे बचाया भी था।

पहली बार जब गाँव के ही बीबेन ने दारू पीकर उसे उसी के आंगन में जकड़ लिया तो भरत ने उस पर कुदाल से हमला बोल दिया,और दूसरा होली में जब गाँव के लड़कों ने उसके साथ गैंग रेप की कोशिश की तो उसी ने सब पर कुल्हाड़ी से हमला बोल दिया था.
हेडमास्टरनी इसे लेकर बहुत परेशान हो गयी थी,उधर कुसुम अपने लिए लडका ही नहीं पसंद कर रही थी,21 22 की उम्र में लड़कियों का रूप वैसे भी सबसे ज्यादा निखरता है और कुसुम का यौवन भी निखर रहा था,गाँव के ही लोग उसके दुश्मन बने हुए थे,अकेली लडकी जानकार वो उनका साफ्ट टार्गेट थी .लगातार उस पर बुड्ढों से लेकर   जवानों तक की नियत खराब थी.
उधर भरत में सब खूबियां थी बस जातिबन्धन के कारण वो आगे नही बड़ पा रही थी। हेड मास्टरनी भारत को जानती थी पसंद भी करती थी,मगर वो    ये भी जानती थी गाँव वाले इस रिश्ते को नहीं मानेंगे हंगामा हो जायेगा.
उधर उन दोनों  के    मिलने के चर्चे गाँव भर में होने लगे थे. दोनों एक दूसरे को घण्टों निहारते रहते थे, कभी खेतों में , कभी स्कूल के गेट पर। कहते कुछ नही।
दिन में जो गांव के लड़के और बुजुर्ग गांव के रिश्ते की मर्यादा से वन्धकर उसे कुसुम बहु या कुसुम भाभी कहते थे, शाम ढलते ही वह सिर्फ कुसुम पर उतर आते, कम उम्र की विधवा अक्सर ऐसे ही गांव घरों में देखी जाती है।
गाँव की औरतों के पति जहां उस पर लट्टू हुआ घूमता है वहीं वह पत्नियां वहीं उसे ही डायन कह देती हैं।
खैर कुसुम ने भरत को एक रोज दिल की बात बता दी, उसने ये भी कहा कि गांव छोड़कर शहर में चले जायेंगे कोई नही होगा वहां ताने मारने वाला, भरत भी आधे मन से राजी हो गया।हेडमास्टरनी ने भी मदद का पूरा भरोसा दिया.
उधर भरत ने सोचा कि गाँव में आखिरी दिन है तो गाँव वालों से लिया अपना कर्जा चूका दूं और गांव में अपने कर्जदारों का कर्जा चुकाने चला गया. लोगों ने पूछा कि कहाँ जा रहा है तो जो ख़ास थे उन्हें सच बता दिया बाकी को झूठ.रात में वह घर आ गया.
अगले दिन कुसुम के घर के बाहर पुलिस खडी थी, उसकी खून से लथपथ लाश सबकुछ बयान कर रही थी, उसके जननांगों में टार्च घुसाई गई थी। भरत सूखी आंखों से सब देख रहा था , उसे ही गिरफ्तार भी करवाया गया था।हेडमास्टरनी  जानती थी कि भरत निर्दोष है,  लेकिन आख़िरी बार भरत को ही कुसुम के साथ देखा गया था.
सच ये नही था कुसुम का देवर भी इस बात को जानता था, महीने भर बाद जब मामला शांत हुआ तो हेडमास्टरनी राम को लेकर भारत के पास गयी. उन्होंने  भरत से सारी कहानी सुनी।
उन्हें पता चला कि गांव के ही तीन लोगों को भरत ने सब कुछ बताया था, उन्होंने पुलिस से दोबारा जांच करवाई ,पडोस का सयम काका दोषी पाया गया,संयम भरत का ख़ास था,भरत उसके खेतों में भी बंटाई पर काम करता था,संयम उसे शराब से लेकर पैसे तक सब भरपूर देता था,इसलिए भरत बातों ही बातों में संयम को सब कुछ बता गया.
भारत के जाने के बाद संयम ने कुसुम के घर के पीछे से दरवाजे में दस्तक दी,वह जानता था कि भारत भी इसी रास्ते वहां जाता है,कुसुम को भी लगा कि भारत ही है इसलिए उसने दरवाजा खोल दिया,और दरवाजा खुलते ही संयम उस पर टूट पड़ा,कुसुम ने पूरी ताकत से उसका विरोध किया लेकिन एक शराबी दुगनी ताकत वाला हो जाता है अक्सर एसे मामलों में .कुसुम ने संयम की आँखों को लगभग नोच दिया, बड़ी वाली टार्च से संयम पर भरपूर वार किया,मगर संयम ने वह वार बचा लिया,गुस्से में संयम से उसी टार्च का इस्तेमाल कुसुम पर किया ,वह बेहोश हो गयी,पहले तो संयम ने अपनी पूरी हवस उतारी और उसके बाद गुस्से में टार्च उसके अंदर घुसा दी,उसके अन्दरूनी अंग घायल हो गए थे,लगातार खून बह रहा था और संयम जा चुका था,सुबह तक इतना खून बहा कि कुसुम मर गयी.

सयम को सजा हुई मगर सिर्फ 7 साल। और सजा भी ऐसी कि वह महीने में 15 दिन घर मे नजर आता।लगभग रोज ही पैसे खिलाकर वह जेल से पैरोल पर आ जाता.
एक दिन बातों बातों में उसने उस रात के किस्से छेड दिए कि कैसे उसने कुसुम को रेप करके मारा। वह बात बात पर अपने ठाकुर खून का दम्भ भरे जा रहा था और आस पास लौंडे मजे लेकर सुन रहे थे। तभी कहीं से कुसुम का देवर राम प्रकट हुआ हाथ मे डंडा लिए। उसने प्रहार किया ही था कि संयम का धड़ जमीन पर। दूसरीं तरफ भरत था हाथों में खून से सनी कुल्हाड़ी के साथ।

ओछा और अच्छा

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