बांगड़ूनामा

कौ ठगवा नगरिया लूटल हो- कबीरदास

अक्टूबर 4, 2018 ओये बांगड़ू

कबीरदास को भोजपुरी में नहीं पढ़ल तो समझों कछु नाहिं पढ़ें. अब तक कबीरदास दोहें हिंदी और संस्कृति में तो खुबे पढ़े होंगें. लेकिन भोजपुरी में कबीरदास का लिखा पढ़ल तो एक अलग ही कोटि का ज्ञान मिल जाई ओए बांगड़ू. तो इह ला कबीरदास का लिखल “कौ ठगवा नगरिया लूटल हो”

 

कौ ठगवा नगरिया लूटल हो

चंदन काठ कै वनल खटोलना, तापर दुलहिन सूतल हो

उठो री सखी मोरी माँग सँवारो, दुलहा मोसे रूसल हो

आये जमराज पलंग चढ़ि बैठे, नैनन आँसू टूटल हो

चारि जने मिलि खाट उठाइन, चहुँ दिसि धू-धू उठल हो

कहत कबीर सुनो भाई साधो, जग से नाता टूटल हो

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *