ओए न्यूज़

कौन भाजपाई?कौन कांग्रेसी?सब भविष्य की गर्त में

जनवरी 18, 2017 ओये बांगड़ू
व्यंगकार विनोद पन्त

उत्तराखंड में दलबदल के कारण इतनी गड़बड़ हो चुकी है कि मतदाता परेशान है किसे क्या समझ कर कैसे वोट दे , पुराना भाजपाई कांग्रेसी हो गया है तो कांग्रेसी भाजपाई . कल तक पानी पी पी कर कोसने वाला आज उसी पार्टी की तारीफ़ में गजलें गा रहा है. एसा लग रहा है भाजपा ने कांग्रेस को टिकिट दिया है और कांग्रेस ने भाजपा को टिकिट दिया है. बता रहे हैं विनोद पन्त कि कैसा कैसा फील हो रहा है .

हरदा, चनदा, गोपदा, अमर दा, अन दा, खड़क दा, नरैण दा, सब आ गये हैं बल पार्टी में . चुनाव की तैयारी जो चल रही ठैरी . अच्छा जी एक बात बताओ ये सब नेता बागी क्यों हो गये ? यहां तो आधे इधर जाओ आधे उधर जाओ बाकी मेरे पीछे आओ हो रहा ठैरा .
तुम लोगों ने दिमाग ही नहीं लगाया . साच्चि कहो तो ये बुसकट(नेहरू जेकेट) की फटी जेब का का कमाल ठैरा . बास्कट उतार दिया जेब में हाथ डाला तो हाथ घ्वास्स कन नीचे आ गया . जेब से सब नेता टपक टपक कर घुरी गये .

नीचे सौज्यू मेरा मतलब अमित ज्यू खड़े थे . लोग गिरते गये वो समावते रहे . मुझे अपने यहां का मलकराम याद आ गया . वह सभी घरों से टीन टप्पर फटे पुराने बोरे टूटे फूटे मोस्टे तिरपाल उठाकर अपने छाने में डालता रहता . चीड़ का पिरूल उपर से डाल देता . अब एक खम्बे पर टिका उसकी छाने का पाखा हो गया भारी . बरसात में पानी बिलकुल नही आया और सारा पानी मलकुवा के छाने
की छत पी गयी . वजन बढा तो सारा पाख एक दो बरसात में मलकराम के ख्वारन पड़ गया . बेचारे
की मरेल गाय भी च्यापी(दब) के मर गयी . मलकुवा ने फिर हिम्मत नहीं हारी फिर छाना बनाया अब गरमियों में जैसे ही एक आग का चिंड़ुका(चिन्गारी) पड़ा छाना स्वाहा हो गया . बस जला हुवा खम्बा बचा . वैसे इस किस्से का चुनाव से कोई लेना देना नहीं ठहरा . यहां तो चुनाव एक खम्बा ही जिता देगा .
पिछले कुछ दिनों से बड़ा कनफ्यूज हूं . नन्दाबल्लभ, कान्तिबल्लभ, नारायण सिंह,  हुकम सिंह कौन किस पाल्टी में है किसमें गया किसमें जाएगा किसमें रहेगा किसमें नहीं रहेगा इसका जवाब ब्रह्माजी
के पास भी नहीं है बल .

भविष्यवक्ता ज्योतिष पगली जैसे गये हैं बल, मेरा क्या है  वोट देना ही हुवा . प्रजातन्त्र में अधिकार ठैरा . असली काग्रेस को दूं , नकली काग्रेस को दूं , भाजपाई काग्रेस को दूं , बागी काग्रेस को दूं . घर वापसी वाले काग्रेस को दूं . छोड़ चुके काग्रेसी को दूं . आने वाले काग्रेसी को दूं . ये भविष्य के गर्त में हैं . हां जी सही लिखा है मैंने – भविष्य के गर्त में है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *