गंभीर अड्डा

करतारपुर कॉरिडोर, वोटबैंक का कॉरिडोर

नवंबर 30, 2018 ओये बांगड़ू

धर्म के मामले में उंगली करने पर वोटबैंक में भयंकर रूप से हानि होती है, ये एक शुद्ध राजनीतिक कोट है। मल्लब ये समझ लो कि कोई अगर धर्म की बात कर रहा है या धर्म के नाम पर कुछ कर रहा है तो राजनेता का धर्म है कि चुपचाप उसे देखे, कोई एक्शन न ले। अगर वो कोई एक्शन लेने की कोशिश करता है या कोई एक्शन लेता है तो उसे अपने तगड़े वोटबैंक से हाथ धोना पड़ेगा

हम लोग वैसे भी मुद्दों पर वोट नही देते बल्कि धर्म जाति पर देते हैं। इतने सालों में एक बात बड़े अच्छे से समझ आई है कि भारतीय समाज मे वोटिंग के लिए पहले रिश्तेदारी, फिर जाति, फिर धर्म उसके बाद कहीं जाकर मुद्दे मायने रखते हैं।

खैर हम बात कर रहे हैं सिद्धू के पाकिस्तान जाकर करतारपुर कॉरिडोर खुलवाने की, करतारपुर जो है सिखों का धार्मिक स्थल है, बॉर्डर से 3 किमी दूर। इस तरफ भारत उस तरफ पाकिस्तान.

तो भारतीय श्रद्धालुओं , खासकर सिख श्रद्धालुओं का वहां दर्शन करना भारत पाक सम्बन्धों के कारण नामुमकिन था। अब करतारपुर के बारे में जान लीजिए। इस जगह पर सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव 18 साल रहे। बताया जाता है कि करतारपुर में ही गुरु नानक देव जी ज्योति ज्योत समा गए और जब मुस्लिम और सीखों में उनके शरीर को जलाने और दफनाने की लडाई होने लगी तो उनका शरीर फूल में तब्दील हो गया. आज भी करतारपुर में एक तरफ गुरुद्वारा है और दूसरी तरफ दरगाह. अब सिखों ने अपने गुरुओं की हर जगह को बड़ा सहेज कर रखा है। वहां सिखों की अगाध श्रद्धा होती है। ऐसे में करतारपुर जैसी जगह पर श्रद्धालुओं का नही जा पाना उनके लिए कितना परेशानी का सबब था उन्ही से पूछिए.

आज तक की श्वेता सिंह लगातार कहे जा रही थी कि करतारपुर कॉरिडोर खुलने के क्या नुकसान हैं, मगर एबीपी न्यूज की रुबिका लियाकत ने भी ग्राउंड रिपोर्ट करके फायदे बताना शुरू कर दिया हमें भी लगा सही है। दोनो इतनी जानकारी दे रहे हैं तो ले लेते हैं।

वैसे इंडिया टुडे ग्रुप से राजदीप सरदेसाई भी उधर ग्राउंड रिपोर्ट कर रहे थे, तब हमने सिख श्रद्धालुओं को जय जय सिद्धू कहते सुना। श्वेता सिंह के नुकसान और रुबिका लियाकत के फायदे धरे के धरे रह गए जब राजदीप सरदेसाई को सिख कह रहे थे कि, सब सिद्धू ने कर रखा है,हमारा दर्द उसी ने समझा वगेरह वगेरह

खैर सिद्धू ने कॉरिडोर खुलवाने के लिए क्या किया पता नही मगर धर्म के नाम पर वोटबैंक को अपनी तरफ खींच जरूर लिया। आज तक बॉर्डर से दूरबीन लगाकर दर्शन करने वाले श्रद्धालु अब कॉरिडोर से जाएंगे और माथा टेक कर आएंगे।

बाकी सिखों के लिए सिद्धू हीरो है और पॉलिटिक्स में भी है। वह जहां कहेगा वहां वोट पड़ेगा भी.

अब इस मामले में शुरू में भाजपा ने उंगली की थी, मगर जल्द ही संभल गए और अपने दो मंत्री भेज दिए ताकि वोटबैंक की हानि न हो। हालांकि तब तक जो हानि होनी थी हो गई। बाकी सिद्धू तारीफ बटोर ले गए दबा कर।

बाकी देशवासियों ने श्वेता सिंह की रिपोर्ट देखकर ये भी कहा कि सिद्धू ने आतंकियों के लिए रास्ता खुलवा दिया। खैर जो भी हो। धर्म के नाम पर पूरा वोटबैंक नही गया थोड़ा बच गया.

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