यंगिस्तान

काकू की थै-लींण यात्रा

अप्रैल 24, 2018 Girish Lohni

बीते सप्ताह काकू थै-लींण की ऐतिहासिक यात्रा से लौट चुके हैं. जानकारों की माने तो काकू आधिकारिक रुप से थैलींण की यात्रा करने वाले राज्य के पैले पूर्ण रुपेण सभ्य जीवित आदिम हैं. इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में काकू की यात्रा की तुलना राहुल सांस्कृत्यान की एशिया यात्रा के साथ दर्ज किये जाने की मुहिम तेज है.

काकू ने थै-लींण से स्व-रोजगार उत्पन्न करने के चमत्कारी औषधि खोजने का फार्मूला हस्ताक्षरित किया है. इस क्र्म में वापसी के बाद सबसे पैंली सरकारी नौकरी में कटौती में कमी की है. काकू ने 2016 की विज्ञप्ति में शुध्दि पत्र लाते हुए वित्त विभाग में सहायक आयुक्त के 32 पदों की संख्या को घटाकर 4 कर दिया और वाणिज्य कर अधिकारी के 51 पदों को घटाकर 5 कर दिया.

काकू के थै-लींण ज्ञानानुसार लोग तब तक स्व-रोजगार तक नहीं बढ़ेंगे जब तक कि उनको सरकारी नौकरी का भ्रम रहेगा. सरकारी नौकरी का भ्रम टूटेगा तो लौंडे लफाड़े दिल्ली हल्द्वानी देहारदून को कोचिंग के लिये भी नि पलायन कर पायेंगे.

काकू ने थै-लींण यात्रा से अपने दिव्य चक्षु खुला आये हैं उनको दिव्य चक्षु से ज्ञात हुआ कि ये लौंडे जाते तो सरकारी नौकरी की तैयारी में हैं लेकिन फिर देहारादून वाला हरिद्वार में राज्य के ठूल बा की कम्पनी के टरक चलाता है दिल्ली वाला गाजियाबाद गुरुग्राम में पिसता है और हल्द्वानी वाला सिडकुल में घुनिता है. इसलिए पहला कदम राज्य में सरकारी नौकरी का भरम तोड़ना होगा.

काकू ने पार्टी कार्यकर्ताओं के नाम संदेश में कहा है कि धैर्य रखें जल्द ही पार्टी कार्यकर्ताओं के लिये थै-लींण को हरद्वार की तर्ज पर पवित्र घोषित कर दिया जायेगा. और सरकार थै-लींण यात्रा हेतु अनुदान भी जारी करेगी.

बाकि काकू ने अभी थै-लींण वाला झौला अभी तक पूरा नि खोला है. कै रै हैं कि टैम-टैम पे खोलता रहूंगा. बाकि काकू ने थै-लींण की आधिकारिक यात्रा करने के साथ राज्य में विकास के नये द्वार तो खोल ही दिये हैं.

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