यंगिस्तान

जोहान्सबर्ग से चिट्ठी -12

नवंबर 1, 2016 ओये बांगड़ू

आपको अगर लगता है कि सिर्फ इण्डिया में कालेज स्टूडेंट्स हड़ताल करते हैं तो आप गलत हैं, हिन्दुस्तान ही नहीं विदेशों में भी स्टूडेंट्स हड़ताल करते हैं आखिर लोकतंत्र है भई. जैसे जोहान्सबर्ग में आजकल स्टूडेंट्स फ्री एजुकेशन के लिए मांग कर रहे हैं. बनारस के विनय कुमार बता रहे हैं जोहान्सबर्ग के बारे में

यहाँ की पढ़ाई के बारे में कुछ दिलचस्प चीजें और भी हैं| आप फर्ज कीजिये कि आप हिंदुस्तान में किसी को कहते हैं कि आप के बच्चे ने मेट्रिक या हाई स्कूल पास कर लिया है तो वो क्या सोचेगा| उसे तो यही समझ में आएगा कि बच्चे ने दसवीं पास कर ली है और अब वह 11 वीं में पढ़ेगा| लेकिन इस देश में, कई अन्य यूरोपीय देशों की तरह (दरअसल यह देश सिर्फ कहने के लिए अफ्रीका है, अधिकतर मामलों में यह देश यूरोप का ही हिस्सा लगता है), बच्चों का मेट्रिक या हाई स्कूल पास करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि होती है| अब वो किस लिए तो बताते हैं- यहाँ पर मेट्रिक या हाई स्कूल मतलब हिंदुस्तान का 12 वीं होता है|  उसे पास करने के उपलक्ष्य में बच्चे बहुत बड़ी बड़ी पार्टी करते हैं जिसे ग्रेजुएशन पार्टी कहते हैं (हिंदुस्तान में ग्रेजुएशन पार्टी का मतलब आप जानते ही हैं, ग्रैजुएट होना)|image3

बच्चों के साथ साथ उनके माता पिता के लिए भी ग्रेजुएशन पार्टी बहुत महत्वपूर्ण होती है| एक आम हिंदुस्तानी के लिए बच्चों की इस पार्टी की कल्पना भी करना बहुत मुश्किल है, इसमें लड़के लड़कियां देर रात तक शराब पीते हैं और नृत्य इत्यादि भी करते हैं| इसके लिए पूरे साल तैयारी की जाती है और अलग से ड्रेस भी सिलाया जाता है| इसके बाद यहाँ पर बहुत से बच्चे किसी नौकरी में लग जाते हैं, बशर्ते उनकी उम्र हो और कुछ बच्चे ही आगे पढ़ाई करने की सोचते हैं|images

मेट्रिक के बाद की पढ़ाई यूनिवर्सिटी की पढ़ाई कहलाती है और बच्चे इंजीनिरिंग, मेडिकल या किसी और विषय में दाखिला लेते हैं| जोहानसबर्ग, प्रिटोरिया और केप टाउन में कुछ अच्छी यूनिवर्सिटीज हैं जिनका स्तर काफी अच्छा माना जाता है|

जो लोग भारत में बेरोजगारी से त्रस्त हैं उन्हें यहाँ के आंकड़े भी चौका देंगे| सरकारी तौर पर इस देश में लगभग 27 प्रतिशत बेरोजगारी है लेकिन अगर गैर सरकारी आंकड़ों पर गौर किया जाये तो लगभग 40 प्रतिशत लोग यहाँ बेरोजगार हैं और सरकार उनके लिए भत्ता देने का फैसला कर चुकी है|fees-must-fall-protests-south-africa-610x394

पिछले तीन महीने से यहाँ पर छात्रों फीस बढ़ाने के खिलाफ द्वारा हिंसक हड़ताल की जा रही है और कई यूनिवर्सिटीज महीनों से बंद हैं| छात्रों की मांग है कि शिक्षा को फ्री किया जाए और बढ़ी हुई फीस तुरंत वापस ली जाए| पिछले वर्ष भी इसी तरह उन्होंने हड़ताल करके फीस को बढ़ने नहीं दिया था और उनका सोचना है कि आगे भी इसी तरह का प्रोटेस्ट किया जाएगा|

खैर अब शिक्षा फ्री होगी या नहीं, ये तो नहीं पता, लेकिन अब राजनीति इसमें भी घुस चुकी है और शायद इस तरह की हड़तालें आगे भी देखने को मिलती रहेंगी यहाँ पर|

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जोहान्सबर्ग से चिट्ठी 11

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