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जिन्ना की तस्वीर के बहाने

मई 4, 2018 कमल पंत

ये जिन्ना विवाद क्यों है ? इसे समझने से अच्छा ट्रिगोमीट्रि समझने की कोशिश की जाए तो ज्यादा आसानी होगी, एक कालेज है अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जहाँ करीब अस्सी साल पहले 1938 में  एक शख्स को आजीवन छात्रसंघ सदस्य की मान्यता दी गयी,उस शख्स का नाम था जिन्ना.उससे पहले महात्मा गांधी को भी मिली थी, फोटो लगाने का रिवाज था तो फोटो भी लगाई गयी.अब देश के हालात बदले,जिन्ना मुस्लिमों के लिए अलग पाकिस्तान की मांग कर बैठे और अलग करके चले गए 1947 में .

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने अपने इतिहास को संजोये रखा,जैसे भारत में बहुत जगह चीजों को संभाल कर रखा गया है वैसे ही इस यूनिवर्सिटी में भी जिन्ना की फोटो आज भी मौजूद है.हालांकि भारत में रह गए मुस्लिम जिन्ना को पसंद नहीं करते क्योंकि अगर पसंद करते तो उस समय जा चुके होते. खैर इस जगह अस्सी साल बाद अचानक एक दिन एक मांग उठती है कि फोटो हटाओ,इत्तेफाक से जिस दिन मांग उठती है उसी दिन वहां आने वाले होते हैं पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी.

अब मांग उठाने में सबसे आगे हिन्दू जागरण मंच,कोइ छुटभैया नेता कह रहा होता है कि फोटो हटाओ,यूनिवर्सिटी के लिए जमीन तो फलाने राजा ने दी आपने उसकी तो नहीं लगाई कोइ फोटो. अब मामले में एंट्री लेता है यूनिवर्सिटी छात्र संघ ,जिन्हें इस बात का गुस्सा ज्यादा है कि बीजेपी की तरफ से मांग क्यों उठ रही है क्योंकि तब तक स्थानीय एमपी संतोष के बयान भी आ चुके होते हैं ,जिन्ना फोटो हटाओ के सम्बन्ध में. बाहर हिन्दू जागरण मंच को सम्बल मिलता है और हो जाती है कुटान शुरू. थोड़ा यूनिवर्सिटी के छात्र पिटते हैं थोड़ा पुलिस वाले. और वाईस चांसलर कहते हैं कि ये एतिहासिक दस्तावेज हैं यूनिवर्सिटी नहीं हटाएगी.
अब शुरू होता है सोशल मीडिया वार, जहाँ एक धडा लगातार जिन्ना की करतूतों को गिना रहा होता है और दूसरा धडा बीजेपी की तानाशाही पर गुस्सा कर रहा होता है.एक के लिए जिन्ना की फोटो देशभक्ति में शामिल हो जाती है मतलब फोटो हटाना देश को आजादी दिलाने    बराबर और दुसरे के लिए तानाशाही के खिलाफ युद्ध ,आवाज उठाने वाली बात.  इस बीच दोनों की तरफ से एक बात कामन रूप से कही जाती है कि जिन्ना दोनों में किसी को पसंद नहीं, लेकिन जिन्ना की तस्वीर को हटाने संबंधी मामले को देखने का दोनों का अपना अपना नजरिया.

संघी जहाँ इसमें देशभक्ति तलाशने के बहाने अपनी कुंठा बाहर निकालने को उतावले हो रहे हैं ,वहीं मोदी विरोधियों के लिए ये मुद्दा अचानक से मोदी सोच को नीचे गिराने का आसान हथियार.

जिन्ना के बहाने दोनों अपनी अपनी कुंठा बाहर निकाल रहे हैं

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