बांगड़ूनामा

झन्न गुरु के कारनामे -1

फरवरी 9, 2018 कमल पंत

झन्नाटेदार थप्पड़ के स्वामी थे गुरु झन्न जी, झन्न उनका नाम झन्नाटेदार के शुरुवाती दो शब्दों के कारण ही शायद पड़ा हो. एक अलग ही रुआब था उनका,5 फुट की हाईट भले ही थी लेकिन 6 फुटों को भी जब थप्पड़ लगा देते थे तो वो सब पानी मांगते फिरते थे.उनके बारे में कहा जाता था कि बचपन में उनके माता पिता समेत सभी पड़ोसियों ने उन्हें इतने थप्पड़ जड़े हैं कि आज उनके हाथ में भगवान की वो मेहर है कि हर तरह का थप्पड़ लगा सकने में माहिर हो चुके हैं.
वो थप्पड़ बाज यूंही नहीं बन जाता ,हालात और मेहनत दोनों लगते हैं इस खुदा के हुनर को सीखने के लिए.तो झन्न गुरु के हालात तो कुछ यूं थे कि घर में बाप और पड़ोसियों के थप्पड़ खा खा कर उनका दिमाग झन्ना गया था इसलिए वो ज्यादातर स्कूल में रहना पसंद करते थे.स्कूल में मास्टर भी जमकर थप्पड़ लगाता था लेकिन उन थप्पड़ों का फायदा ये था कि हर थप्पड़ के साथ वो कुछ नया सीखते जाते,आखिर था तो स्कूल ही सिखाने का केंद्र जो हुआ.कुछ न कुछ सिखाएगा ही. झन्न गुरु ने स्कूल में मास्टरों के थप्पड़ खा खा कर इतना सीख लिया कि खुद ही मास्टर बन गए.सच्ची वाले मास्टर.
अब बचपन में खाए तरह तरह के थप्पड़ों के अनुभव का उन्होंने भरपूर इस्तेमाल किया और बच्चों पर जमकर प्रेक्टिस जमाई.एक दौर तो एसा भी आया कि स्कूल में जितनी क्लास वो पढाते थे उतनी सभी क्लासों के हर बच्चे ने उनके हाथ के प्रेक्टिसी थप्पड़ खाए थे.आज वो सभी सभी बच्चे छाती ठोककर कहते हैं कि झन्न गुरु को थप्पड़ों का राजा बनाने में उनका सबसे बड़ा योगदान रहा है.
झन्न गुरु जब तक पढाते थे तब तक तो सिर्फ बच्चों को थप्पड़ जड़ते थे लेकिन स्कूल से निकलते ही उन्होंने समाज के ठेकेदारों पर भी थप्पड़ जड़ने शुरू कर दिए.
उनका पहला आफिसियल बाहरी थप्पड़ खाया जल निगम के जेई ने, जो उनके नए मकान के पानी के कनेक्शन के लिए घूस मांग रहा था,झन्न गुरु ने रख के दो हाथ उसके गाल पर जमा दिए,पहला थप्पड़ अर्ध गोलाकार चार ऊँगल का स्पाट थप्पड़ था और दूसरा झन्नाटेदार कान सुजाऊ थप्पड़. जलनिगम के जेई की उस थप्पड़ के बाद जिन्दगी बन गयी.उसने झन्न गुरु को अवतारी घोषित कर दिया,दरअसल अपनी पत्नी के बोलने से परेशान जेई ने सभी उपाय कर डाले थे मगर पत्नी थी की बकाधाय थी बोलना ही बंद न करती ,हारकर जेई ने घर जाना कम कर दिया था. लेकिन अब वो रोज घर जाया करता था,झन्न गुरु के झन्नाटेदार थप्पड़ के कारण उसका कान का पर्दा टे बोल गया था और उसे अब अपनी पत्नी का एक भी शब्द सुनाई नहीं देता था.उधर विभाग में उसने आंशिक विकलांगता का सर्टिफिकेट लगाकर अपने घर के पास की पोस्टिंग मांग ली थी ,प्रमोशन के साथ.झन्न गुरु के प्रथम थप्पड़ का परम प्रताप इतना फैला की झन्न गुरु के पास लोग अपनी परेशानी लाने लगे थे

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