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जम्मू विधानसभा भंग,सही या गलत?

नवंबर 22, 2018 ओये बांगड़ू

जम्मू के राज्यपाल ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि गठबंधन अच्छा नही है राज्य के लिये, इसलिए सरकार नही बनने दी। मल्लब रीजन तो बहुते ई दे दिए मगर सारे रीजन इस टाईप के हैं कि बल्ला मेरा है, मुझे बैटिंग नही तो खेलने ही नही दूंगा मैच रद्द.

अब सोचो 5 महीने से सरकार क्यों नही बनाई जैसे जवाब राज्यपाल की तरफ से आ रहे हैं तो पत्रकार क्या पूछेगा कि ‘सर 5 महीने से आपने क्यों नही रद्द कि विधानसभा आज ही क्यों देववाणी पर विधानसभा रद्द कर दी।चलो मानते हैं वह आपका अधिकार है. आप जब चाहे विधानसभा को रद्द कर सकते हैं एक वैलिड रीजन देकर, मगर ये क्या बात हुई कि गठबंधन की सरकार राज्य के लिए अच्छी नही है ।

आप तो मल्लब तय करके बैठे हैं कि गठबंधन अच्छा नही है, वैसे पहले वाला गठबंधन ठीक था इसमे मिर्च नमक ज्यादा है। क्यों है ना?

राज्यपाल जी के मुँह से प्रेस कांफ्रेंस में जवाब सुनकर ऐसा लग रहा था कि ऊपर से आदेश मिले हो कि प्रेस कांफ्रेंस करके जो मर्जी बोल दो फिर ये सब अपने आप लड़ेंगेज़ बहुमत किसी के पास है नही तो होना जाना कुछ नही है। फेसबुक ट्विटर पर दो दिन थू थू होगी बाद ने राष्ट्रपति शासन लगते ही सत्ता अपने पास ही आनी है इंडाइरेक्टली।

संविधान के साथ अच्छा खिलवाड़ हो रहा है। वैसे 84 में ये इंदिरा गांधी कर चुकी है। कुछ नया नही हो रहा। बस इतिहास को दोहराया जा रहा है। पहले चेहरा कोई और था अब कोई और है.

खुशी इस बात की है कि राज्यपाल ने पीएम की परम्परा को तोड़ते हुए प्रेस कांफ्रेंस की और मीडिया के लोगों को बताया कि आखिर क्यों उन्होंने विधानसभा भंग की। हम तो भई इसी बात से खुश हैं। बाकी जेएंडके को हम कहाँ ज्यादा तवज्जो देते हैं। हमें उधर की जमीन चाहिए लोग नही। ताकि कश्मीर से कन्याकुमारी वाला डायलाग पूरा हो सके।

सत्यपाल मलिक साहब ने जेएंडके पर प्रेस कांफ्रेंस करके सबको जो महत्वपूर्ण बातें बताई वो निम्न हैं। हर बात पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।

5 महीने में बड़ी मुश्किल से जम्मू के हालात पर काबू पाया है। दोबारा ऐसी गठबंधन की सरकार बनी तो राज्य हित में नही है.

उन्होंने कहा, ‘किसी को भी मौका देता तो बड़े पैमाने पर खरीद-फोरख्त होती. निकाय चुनाव में ईश्वर की कृपा से एक चिड़िया भी हताहत नहीं हुई. हमारी फोर्स अपनी जान की बाजी लगाकर राज्य में संतुलन लेकर आई है. आलम यह है कि राज्य में पत्थरबाजी कम हुई है. 60 आतंकवादी मारे गए. अगर सरकार बनाने का मौका देते तो राज्य में अस्थिर सरकार बनती, जिससे पहले जैसे हालात फिर बन जाते.’

साथ ही उन्होंने कहा, ‘मैंने यह फैसला राज्य के हित में लिया है. मेरे पास कोई आया नहीं, किसी ने विधायकों की परेड भी नहीं करवाई. मैंने किसी से बातचीत नहीं की. मैंने यह काम जम्मू-कश्मीर के संविधान के तहत किया है. जम्मू-कश्मीर के संविधान में प्रावधान है कि मुझे इस काम के लिए राष्ट्रपति या देश के संसद से अनुमति नहीं लेनी पड़ती. ये मेरा अधिकार था तो मैंने ऐसा किया. महबूबा मुफ्ती बहाने बाजी कर रही हैं. अगर उन्हें कुछ गलत लगता है तो वो कोर्ट जाएं. सोशल मीडिया से सरकार नहीं बनती. पार्टियां एक दिन पहले भी आ सकती थीं. किसी ने अपना आदमी तक नहीं भेजा.’

 

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