यंगिस्तान

इंसानों की तरह बात करने वाले नाग की कहानी

अक्टूबर 8, 2018 ओये बांगड़ू

भारत में नाग देवता की पूजा का प्रचलन प्राचीन काल से ही चला आ रहा है।  कुछ पुराणों में तो सर्पमानव के होने का भी उल्लेख मिलता है. यह भी एक ऐसे ही नाग की कहानी है जो न सिर्फ लोगों को दिखाई देते है बल्कि कुछ लोगो को इंसान की आवाज़ में उन से बात करने का भी अनुभव हुआ हैं. राजस्थान के जयपुर से 70 किलोमीटर दूर एक गाँव के नाग की सच्ची कहानी हमें बता रहे महेश जी महाराज जिन्होंने बेहद करीब से नाग देवता के होने का अनुभव किया.

जयपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर किसी जमाने में एक सुनारों का गाँव हुआ करता था. समय के साथ गाँव उजड़ गया और लोग अपने घर बार छोड़ शहरों की ओर चल पड़े गाँव मे एक कुआं था जो अब मिटी से भरा है, उस कुँए के पास एक इच्छाधारी साँप रहता है जो इंसान की आवाज में बोलता है. ये बात मुझे जिस इंसान ने बताई उसने उस नाग देवता को देखने के लिए 10 दिन जंगल में बिताए.

तो उस दिन नागपंचमी का दिन था मैंने सोचा कि आज मैं भी नागदेवता की पूजा करूँगा इसलिए मैं सुबह ही दूध ले आया और पूजा के लिए अगरबत्ती व पूजा का अन्य सामान ले आया क्योंकि गाँव में दूध सुबह के समय ही मिलता है. जिस गाँव के  मंदिर में मैं रुका था मैंने पूजा का सामान उस मंदिर में लाकर रख दिया, लेकिन  मंदिर के पुजारी ने नाग देवता के लिए लाए दूध की चाय बनाकर पी ली और दूध खत्म कर दिया. अब जब पूजा का समय हुआ तो मैंने देखा दूध खत्म अब क्या करूँ ? तो फिर मैंने दूध की जगह एक बर्तन में पानी लिया और पूजा का सामान ले कर चल दिया.

जब मैं उस स्थान पर पूजा करने पहुँचा तो मैंने दूध की जगह पानी का बर्तन रख दिया और कहा हे ! नागदेवता आपके नाम का दूध तो महाराज ने पी लिया इसी पानी को दूध समझना और पूजा करके वापिस आ गया. शाम को ही नागदेवता उस मंदिर में पहुच गए और महाराज पुजारी के ऊपर टूट पड़े अब महाराज को समझ नही आया ये क्या हुआ? उन्हें तो ये लग रहा था कि आज उन्हें साँप डंस ही लेगा तभी  पुजारी के बच्चे और पुजारी की पत्नी हाथ जोड़ के नागदेवता के आगे गिड़गिड़ाने लगे कि पुजारी को छोड़ दो नागदेव. जो गलती हो गई उसे माफ कर दो. बच्चों ने कहा हे ! नागदेवता हमारे पिता को छोड़ दो और हमे डंस लो तब कही बच्चों की पुकार पर नागदेवता का गुस्सा शांत हुआ और पुजारी ने कहा कि मुझे क्षमा याचना दो नागदेवता, अब से हर साल नागपंचमी पर मैं आपके स्थान पर दूध चढ़ाऊंगा और पूजा करूँगा. तब से लेकर आजतक हर साल नागपंचमी पर लोग दूर दूर से आते है और नागदेवता के उसी स्थान पर पूजा अर्चना करते हैं.  आज भी यह मान्यता है कि जो लोग वहां नागदेवता के लिए दूध के कटोरे भर के चढाते है उनकी हर मनोकामना पूरी होती हैं .

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