बांगड़ूनामा

इन्कलाब का दहका खाकै गोरी सत्ता मृत होगी – राजेश दलाल

नवंबर 15, 2018 ओये बांगड़ू

इन्कलाब का दहका खाकै गोरी सत्ता मृत होगी

झुण्ड के झुण्ड जां जय जय करते लाहौर जेळ तीर्थ होगी

 

दसौं दिशा लहरागी लपटें भट्ठी होगी लाहौर मैं

भारत मां की लाडली माया कट्ठी होगी लाहौर मैं

क्रान्ति का जन्म होया फेर छट्ठी होगी लाहौर मैं

विकटोरिया के ताज की रे-रे मिट्टी होगी लाहौर मैं

पर भगत सिंह के विचारां कै तै बुलटप्रूफ परत होगी

 

आजादी की शादी मैं बाराती फिरैं क्रान्ति के

जादूगर ज्यूं डमरू बजा करतब करैं क्रान्ति के

धधकती लौ, मस्ताने पतंगे चिपट-मरैं क्रान्ति के

सामण-भादौ बूंदा की जगां अंगारे गिरैं क्रान्ति के

गहरी खाई गुलामी की इब सिर-धड़ से भरत होगी

 

मिलाइयो रै मनै मेरे भगत तै ताऊ चश्मे तार कह

कोयल बोली जब गाऊं तू चाल चलण नै त्यार कह

एक नन्हा मेंमना उछल पड़ा उनै म्हारी नमस्कार कह

ओये-होये रै हम गये काम तै स्वर्ग पड़े अवतार कह

जाऊंगी मै तै मूळ ना मानुं राजा-राणी मैं शरत होगी

 

रंग दे बसंती चौला ओये मां राष्ट्र-गाणा होता जा

जेल-अदालत, काळ-कोठडी ठेल-ठिकाणा होता जा

भूख हडताळी नाचैं कूदैं गजब का वाणा होता जा

आबो-हवा इसी फिरगी रळदू भी स्याणा होता जा

साम्राज्यवाद की बेड़े-बन्दी झेरै डूब गरत होगी

 

भगत सिंह के जिकर सुणे तै होजां सै अरमान खड़े

क्रान्ति के अर्थ बता वो करग्या सबके ध्यान खड़े

राजेश कह या के बणैगी खुद मौत के होगे कान खड़े

वायस-राय नै थाळी मैं भी दीखै हिन्द जवान खड़े

यो नजारा नजर बसा ल्यो ना तै फांसी भी अनर्थ होगी

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