यंगिस्तान

मजमून भांप लेते हैं लिफाफा देखकर -सीबीआई पर अखबारों की हेडिंग

अक्टूबर 26, 2018 ओये बांगड़ू

देश की विषम परिस्थितियों में देश के अखबार अपना योगदान किस तरह देते हैं ये जानना हो तो अलग अलग अखबारों की सिर्फ हेडिंग पर गौर फरमाइये। वैसे भी अखबार पढ़ने वालों में आधे लोग सिर्फ हेडिंग पढ़कर ही काम चलाते है। वह कहते हैं न मजमून भांप लेते हैं लिफाफा देखकर टाइप। ये भी खबर का अंदाजा लगा लेते हैं हेडिंग देखकर। शायद इसी बात को हिंदी अखबारों ने बड़े गौर से नोट किया और सिर्फ हेडिंग के लिए अलग से बन्दा नियुक्त किया।

खैर अखबारी स्ट्रक्चर पर कभी और चर्चा कर लेंगे आज देखते हैं अखबारों ने आईबी के पकड़े लोगों पर किस तरह आज चर्चा की है। अधिकतर अखबारों ने आईबी के पकड़े गए लोगों पर ही अपनी लीड खबर बनाई। उन खबरों पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि अखबार बड़ी चालाकी से खबर को खबर का रूप न देकर अपने अपने एजेंडे के तहत ढाल रहे थे। हालांकि सब अखबार ऐसा नही कर रहे थे फिर भी अब तुलना करनी ही है तो सबकी की जाए।

तो खबर ये थी कि सीबीआई चीफ के घर के बाहर आईबी के लोग पकड़े गए।

हिंदुस्तान ने हेडिंग दी, ‘आलोक वर्मा के  घर जासूसी पर हंगामा”

हेडिंग में कोई कमी नही, लेकिन हमारे यहां आज भी कई लोगों को नही पता होगा कि सीबीआई निदेशक कौन हैं, गृहमन्त्री कौन है, उपराष्ट्रपति कौन हैं वगेरह वगेरह। ये लोग भारत मे सबसे ज्यादा हैं, इन्हें बस वो पद और उसकी इम्पोर्टेंस पता है। अब आलोक वर्मा कौन है इसे जानने की जहमत वो लोग उठाएंगे या नहीं पता नही। मगर हिंदुस्तान ने अपना काम कर दिया, खबर भी बता दी और ये भी नही बताया कि कौन है आलोक वर्मा ?

खैर दूसरा अखबार लेते हैं दैनिक जागरण इसकी हेडिंग थी “सीबीआई प्रमुख वर्मा के बंगले के बाहर आईबी कर्मियों से मारपीट’

तो दैनिक जागरण वाले भाईसाहब जो है वो सीधे सीधे जनता को बताना चाह रहे हैं कि देश के इनोसेंट आईबी वालों से सीबीआई चीफ वर्मा के बंगले में मारपीट हुई है। कहने का मतलब है सीबीआई चीफ गुंडा और आईबी इनोसेंट हीरो। तो जनता जज करे कि देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई..

चलिए आगे बढ़ते है, अगला अखबार है जनसत्ता वो कहता है “सीबीआई निदेशक के आवास के बाहर पकड़े आईबी के चार कर्मी”

पूरी खबर हेडिंग में दे दी। यही हुआ था। सीबीआई निदेशक के घर के बाहर चार आईबी वाले थे। अब जासूसी कर रहे थे या नही ये जांच का विषय हो सकता है। मगर खबर की हेडिंग पूरी ।

अगला अखबार आया अमर उजाला वह भी ऐसी ही बेलेंस हेडिंग देता है। अमर उजाला कहता है “सीबीआई निदेशक वर्मा के घर के बाहर पकड़े आईबी के चार जासूस” पूरी खबर ही हेडिंग में लिख दी, ना काहू से दोस्ती न काहू से बैर। वाह भाई वाह।

वैसे अखबारों का क्या है। जिधर मनी उधर खबर की छनी

वैसे भी फेस्टिव ऑफर है। 2 खबरों के साथ 20 विज्ञापन फ्री

आप देखिएगा आजकल अखबार अखबार कम विज्ञापन पुत्रिका ज्यादा लगते हैं पुत्रिका मतलब पुस्तिका टाइप, पत्रिका से छोटी पुस्तिका से भी छोटी एकदम पुत्री जैसी पुत्रिका

सबको मिल रहे बस बांगडू को न मिल रहे.

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