गंभीर अड्डा

भारत में अफवाहों के पीछे दौड़ती भीड़

जुलाई 12, 2018 ओये बांगड़ू

यह  आर्टिकल  मीडिया स्टूडेंट आदित्य सिंह ने ओएबांगड़ू के लिए लिखा है  

देशभर में ‘बच्चा चोर’ के नाम पर आम लोगों की पीट-पीटकर हत्या (मॉब लींचिग ) के मामले लगातार बढ़ रहें हैं. व्हाट्सएप की फेक ख़बरों को एकमात्र सच मानने वाली भीड़ कभी भी, किसी की भी हत्या अफ़वाहों और धर्म के नाम पर कर देने को तैयार हैं.  एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015 से अब तक भीड़ द्वारा देश में कुल 62 लोगों की हत्या की जा चुकी है. व्हाट्सएप से फैल रही बच्चा चोरी की अफवाह ने पिछले दो महीनों में तकरीबन  20  लोगों की जान ले ली. यह हालात तब और भयावह हो जाते है जब कोई केंद्रीय मंत्री आरोपियों को मिठाई  खिलाएं  और उसी पार्टी के चीफ़ मिनिस्टर भीड़ द्वारा की गई हत्याओं को सही बताएं.

अहमदाबाद के वाडज में  बच्चा चोरी के अफ़वाह में ऑटो से जा रही 4 महिलाओ को 200 लोगों की भीड़ ने बीच सड़क पर बेरहमी से पीटा जिससे एक महिला की  मौत  भी हो गयी ।सूरत में 43 वर्ष की एक महिला को शादी के 23 साल बाद बच्चा हुआ था वह अपने बच्चे के साथ घर जा रही थी तभी रास्ते कुछ लोगों ने उसे बच्चा चोरी के नाम पर रोक लिया और उसी भीड़ में से एक महिला अपना बच्चा होने का दावा करने लगी फिर थाने में ले जाने के बाद पता चला कि जिसे भीड़ बच्चा चोर समझ रही थी वह बच्चा उसी महिला का था. महाराष्ट्र के धुले जिले में भी बच्चा चोरी के अफ़वाह में 5 लोगों की हत्या कर दी गई ये सभी भीख  माँग कर गुज़ारा करते थे.

वही त्रिपुरा में बच्चा चोरी के नाम पर हिंसक भीड़ ने 4 लोगों की हत्या कर दी जिसमें सूचना एवं संस्कृति विभाग एक कलाकार सुकांत चतुर्वेदी की भी हत्या हुई. ये अपने टीम के साथ बच्चा चोरी के अफ़वाह पर जागरूकता अभियान चलाकर वापस आ रहे थे. बच्चा चोरी के नाम अफवाहें फैलाने का सिलसिला और फिर भीड़ का किसी को भी मारने पर उतारू हो जाना कुछ राज्यों तक सीमित नहीं बल्कि पूरे देश में फ़ैल रहा हैं.

क़ानूनी तौर पर देखा जाए तो भीड़ पर एक साथ केस चलाने का कोई क़ानून नहीं है. जब भीड़ द्वारा किसी की हत्या होती है , तो न्यायपालिका पूरी भीड़ को सज़ा नहीं दे पाती. पिछले कुछ सालों में भीड़ द्वारा हत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. टेक्नॉलजी पर क़ानून लाने की बात भी कई सालों से चल रही है ,पर अभी तक संसद में कोई ठोस क़ानून नहीं आया है. केम्ब्रिज अनलिटिक के फ़ेसबुक अकाउंट लीक में रविशंकर प्रसाद ने एक क़ानून लाने बात की थी. मार्च तक क़ानून आना था ,पर उसके बाद उस क़ानून पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई. कई देशों में इस पर क़ानून है लेकिन भारत में करीब 200 मिलियन व्हाट्सएप यूज़र है लेकिन फिर भी कोई क़ानून नहीं.

बीते चार सालों में बच्चों की किड्नैपिंग ,फिरौती की घटनाए तेज़ी से बढ़ रही है. एनसीआरबी के मुताबित 2013 से लेकर अभी तक इन घटनाओं में 84% तक का इजाफा हुआ है. देश में रोज़ 184 बच्चों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होती हैं,. झारखण्ड में बच्चा चोरी के अफ़वाहों के समय मानव तस्करी की घटना बढ़ी लेकिन पुलिस ने कुछ ठोस करवाई नहीं की, जिसके बाद ये अफ़वाहें और तेज़ी से बढ़ने लगी जिसमें 6 निर्दोष लोग की जान चली गई .

सोशल मीडिया आने से पहले भी भारत में समय पर समय ऐसी अफ़वाह फैलती रहती थी. एक समय जब अफ़वाह  फैली थी मुँहनोचवा पाकिस्तान से आया है लोगों को मार देता है ,डर का माहौल ऐसा बना की लोग रात में डंडे और पानी लेकर सोते थे. इन अफ़वाहों में कई लोगों की जान चली गई. मेरे बचपन के समय भी गाँवों में अफ़वाह फैली की कोई लकड़ सूँघा बच्चों को लेकर चला जाता है ,पर मुझे आज तक नहीं दिखा, इन्हीं अफ़वाहों के कारण गाँवों में समान बेचने आने वालों की कई लोगों की जान चली गई थीं, इस तरह कि तमाम अफवाहों से लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ा और सरकारी तंत्र मुखोटा बनकर रह गया। सोशल मीडिया से पहले ये सारी घटना एक सीमित क्षेत्र तक सिमट के रह जाती थी. लेकिन इस समय ये अफ़वाह कुछ पल में ही पूरे देश में फैल जाती है और कई बेगुनहा लोगों कि जान ले लेती हैं.

बच्चा चोरी अफ़वाहों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट और गृह मंत्रालय ने सख़्त आदेश जारी किया लेकिन हैरानी तब हुई है जब त्रिपुरा के चीफ़ मिनिस्टर कहते है , ‘जनता के फ़ैसले पर आनंद लीजिए.’ इस दौर में टेक्नॉलजी का उतना ही दोष है जितना सरकारी सिस्टम का दोष है. ऐसी घटना किसी भी देश के लिए शर्मनाक है. 2014 के बाद मॉब लींचिग  की घटना में 93% की बढ़ोतरी हुई है और अधिकतर घटना भाजपा शासित राज्यों की है.

एक बड़ा सवाल यह है कि देश में चाइल्ड ट्रैफ़िकिंग, किड्नैपिंग की घटनाओं में इन तीन सालों 83% की बढ़ोतरी हुई है, क्या वही हिंसक भीड़ सरकार से कभी इन बच्चों के बारे सवाल पूछेगी ? सरकार इन बच्चों रेस्क्यू किया होता तो कई निर्दोष लोगों की बच्चा चोरी के अफ़वाह में हत्या नहीं होती कही भारत ऐसा देश तो नहीं बन रहा जहाँ अफवाहों के पीछे दौड़ती भीड़ किसी को भी दौड़ा कर जान लेने को उतारू हैं ?

 

 

 

 

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