गंभीर अड्डा

इंदिरा गाँधी की पुण्यतिथि : 34 साल पहले देश ने ‘आयरन लेडी’ को खो दिया

अक्टूबर 31, 2018 ओये बांगड़ू

आज ही के दिन साल 1984 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की मौत की खबर ने देश को हिला दिया था. आज ‘आयरन लेडी’ कही जाने वाली इंदिरा गाँधी की 34वीं पुण्यतिथि पर लोग उनके प्रसिद्ध भाषण…’यहां तक की अगर मैं देश की सेवा में मर भी जाऊं, तो भी मुझे गर्व होगा…’ को याद कर रहे हैं.

इंदिरा गाँधी पर उन्हीं की सिक्यूरिटी में तैनात सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने ओपन फ़ायर किया था. बताते है कि उस दिन ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ की दो आवाज़ों के बीच मशीन गन और पिस्टल की आवाज़ों के शोर से पूरा इलाका दहल गया था. गोली लगने के बाद इंदिरा गाँधी को एम्स ले जाया गया जहाँ उन्हें दो बजकर बीस मिनट पर मृत घोषित कर दिया गया.

इंदिरा गांधी ने 1966 से 1977 के बीच लगातार तीन बार देश की बागडोर संभाली और उसके बाद 1980 में दोबारा प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन 31 अक्टूबर, 1984 को पद पर रहते हुए ही उनकी हत्या कर दी गई. इंदिरा गाँधी की मौत के लिए 6 जून 1984 के दिन सिखों के सबसे पावन स्थल स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना की कार्रवाई ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ को अहम वजह माना जाता है.

इंदिरा गाँधी की हत्या दिल्ली में सिखों पर कहर बन कर आई. गुस्साई भीड़ को और उकसाने का काम राजीव गाँधी के भाषण ने किया जिसमें उन्होंने कहा था – जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती डोलती ही है. पूरी दिल्ली में खासकर यमुना पार के इलाकों में सरदारों को मारा जाने लगा. दंगों में जगह जगह लूटपाट हुई ,सिख इलाकों में घरों को जलाया गया. आख़िरकार सेना ने मोर्चा संभाला और दंगों पर काबू किया.

 

 

 

 

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