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बैंकों में लाइन का इतिहास खुद को दोहराने वाला है

नवंबर 22, 2018 ओये बांगड़ू

नोटबन्दी के बाद लाइन में लगने का दर्द शायद दो साल में खत्म हो गया हो। इसलिए अब नए सिरे से लाइन में लगने को तैयार हो जाइए। जल्द ही एटीएम के बाहर लगने वाली लाइन का इतिहास खुद को दोहराने वाला है। और इस बार वजह नोटबन्दी नही बल्कि एटीएम बंदी होगा.

जी एटीएम की संस्था कंफेड्रेशन आफ एटीएम इंडस्ट्री ने बताया है कि उनके पास एटीएम को अपग्रेड करने के पैसे नही हैं। मल्लब ये कि जो नए नए नोट सरकार ने निकाले हैं उन्हें एटीएम में फिट करने के लिए पुराने एटीएम को अपग्रेड करने की जरूरत है। अर्थात एटीएम की पूरी अंतरात्मा बदली जानी है। अब देखते हैं ये कैसे बदली जाती है.

संस्था वाले कह रहे हैं कि हमें अगर बदलने को कह रहे हो तो बदलने का पूरा पैसा दो। नही तो हम बैंक को दे देंगे वह करते रहे। फिलहाल भारत में इस समय करीब 2.38 लाख एटीएम मशीनें हैं। लेकिन अगर मार्च तक कोई फैसला नही होता तो करीब 1.13 लाख मशीनों को बंद करना पड़ सकता है. कैटमी वाले तो चलते बनेंगे.बाकी तुम्हारी मर्जी करो या न करो.

अब एटीएम वाले निकल जाएंगे और बैंक कुछ न करेगा तो पैसे निकालने के लिए आपके पास बच जाएंगे वो एटीएम जो नोटबन्दी के बाद लगे हैं। नए वाले .

 

हर शहर में ऐसे एटीएम गिनती के होंगे, सब जगह पुराने वाले लगे हैं। जिन्हें शहर शहर पहुंचाने में ही कन्फेडरेशन आफ एटीएम इंडस्ट्री को 15-20 साल लग गए। अब सोचो नए वाले लगने में कितने और साल लगेंगे। बहुत ही दिक्कत होने वाली है।

दोबारा लाइन में लगना पड़ेगा वह भी घर के पास वाले एटीएम में नही बल्कि उन जगहों पर जहां नए नए अपग्रेडेड एटीएम लगे होंगे। बाकी मार्च तक कुछ हो जाता है तो देखते हैं.

वैसे अपग्रेड करने में 3500 करोड़ लगने वाले हैं और एटीएम वालों के पास पैसे नही हैं। क्या है कि नोटबन्दी की मार वह भी झेल रहे हैं। तो बैंक वाले जो है या तो दोबारा कैशियर रखना शुरू कर दें या दे दें 3500 करोड़.

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