गंभीर अड्डा

हमे एमपी चुनना है पीएम नही

जनवरी 18, 2019 ओये बांगड़ू

अगला प्रधानमंत्री कौन? मोदी नही तो कौन बताइये आप?

ये प्रधानमंत्री कौन वाला जो सवाल है वह पिछले पचास सालों से पूछा जा रहा सबसे बेवकूफाना सवाल है।

आपको सँविधान ने प्रधानमंत्री चुनने की ताकत मिली है या अपना सांसद चुनने की? किसी भी टीवी या अखबार में आपके सांसद के चर्चे नही हैं, या उसके कामों की कोई लिस्ट नही है। सब प्रधानमंत्री कौन में उलझे हैं।

क्रिकेटर मैदान में खेल रहा होता है और बाहर देखने वाला बता रहा होता है उसे कैसे खेलना चाहिए, दर्शक डिसाइड करता है कप्तान किसे बनाना चाहिए। एक आदा तुक्का लग जाता है तो अपने को विशेषज्ञ मानकर कहता है ” देखो मैं न कहता था धोनी को कैप्टन होना चाहिए”। पर क्या वास्तव में दर्शक के अधिकार में है कैप्टन चुनना? नही।

ठीक वैसे ही प्रधानमंत्री चुनना आप दर्शकों के हाथ मे नही है। सँविधान ने हमें हमारा सांसद चुनने की ताकत दी है, हम उसे अच्छा चुने या बुरा ये हमारा अधिकार क्षेत्र है।

मगर पोलिटिकल पार्टियों ने एक् गेम खेला, ऑफर निकाला हमारा बन्दा चुनकर भेजोगे तो ये वाला नेता प्रधानमंत्री बना देंगे, बस हम फंस गए झांसे में,अब हम लालच में वोट देते हैं कि चलो मोदी/ राहुल/माया/मुलायम पीएम होंगे तो इनके बंदों को वोट दो, वह भले ही गुंडा हो , मगर लालच ये कि पीएम वो बनेगा।

अमेठी के मोहल्लो के बारे में , गांवों के बारे में राहुल गांधी को कुछ नही पता, मगर वहां की जनता ने उसे सांसद बना रखा है, उसे नही पता किस क्षेत्र में क्या परेशानी है, उसका प्रतिनिधी इलेक्शन में आकर बता देता है, भाषण लिखने वाला लिख देता है वह अमेठी में रैली कर आता है। गलती किसकी? जनता की, क्यों अपना सांसद सही नही चुना।

बनारस के गांव मोहल्ले ज्योग्राफी मोदी को नही पता, मगर बनारस की जनता ने चुनकर भेज दिया, क्या मिला? मोदी का प्रतिनिधी उसे घाटों में बुलाकर पूजा करवा देता है, हो गया विकास। जनता को क्या मिला ठेंगा।

अपने अधिकार अपनी ताकत का सही इस्तेमाल नही करोगे, तो यूंही पोलिटिकल पार्टियों के झांसे में फँसोगे।

अपना सांसद सही आदमी चुनो, वो पीएम भी सही चुनेगा। तुम्हारा सांसद ही दो कौडि का लफ्फेबाज फान्दे बाज होगा तो पीएम भी वैसा ही मिलेगा।

देश के विकास की शुरुवात आपसे होती है। हर पीएम अपने पहले 5 साल के कामों में नब्बे प्रतिशत ऐसे काम करता है जिनका असर उन्ही पांच सालों में दिखे, क्योंकि अगली बार के वोट मांगने होते हैं और 10 % काम दूरदर्शी सोच के साथ किये गए होते हैं जिनका दूरगामी परिणाम अच्छा निकले, अगर कोई पीएम अपने हर काम को दूरदर्शी सोच वाला बताता है तो या तो वह झूठ बोल रहा है, या उसने कुछ नही किया है।

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