यंगिस्तान

Audio Travelogue- रिकोन्ग पीओ से नाको (4th डे )

दिसंबर 19, 2018 ओये बांगड़ू

4th डे- रिकोन्ग पीओ से नाको..जमा देने वाली ठण्ड और खुबसूरत सफ़र का किस्सा ऑडियो में सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें   

रिकोन्ग पीओ से नाको

120 किलोमीटर

कुल जमा (1113 किलोमीटर)

ढलती शाम मे जब मैं रामपुर बुशहर से रिकोन्ग पीओ की तरफ पहुंच रहा था, तो शाम के अंतिम उजाले मे बरफ़ से ढके पहाड़ हल्के दिख रहे थे, जिससे अंदाजा लग गया था, कि जो भी ये जगह है सुबह लाजवाब दिखने वाली है. यहां रिदंग होटल में मोल भाव करने के बाद 700 रुपये में डील हो गई. 100 रुपये सुकन्या समृधी योजना समझाने के छोड़े गए. अब रात भर दिमाग में शिपकी ला दर्रा घूमता रहा जो यहां से मुश्किल से 60 किलोमीटर होता रहा. पिछले साल चीन देखने का मौका हम सिक्किम मे नाथू ला मे छोड़ चुके थे. अब ये मौका मैं कैसे भी भुनाना चाहता था. चीन तीन दरों से भारत से मिलता है पहला नाथू ला (सिक्किम), दूसरा शिपकी ला (हिमाचल प्रदेश), तीसरा लिपू लेख (उत्तराखंड). तो मैं शिपकी ला जाना चाहता था,लेकिन जो रुकावट थी वो थी परमिट की.

बार्डर एरिया होने की वजह से यहां आईटीबीपी और डीसी ऑफिस की परमिशन चाहिए होती है, तो अपन सुबह पहले कल्पा गया जहां से किन्नर कैलाश रेंज पूरी दिखती है और जो रिकोन्ग पीओ से 9 किलोमीटर ऊपर है. वहां से लौट कर आईटीबीपी के सेंटर गया तो पता लगा आज वहां कुछ कार्यक्रम है, मुझे 9 बजे आने की हिदायत दी गई. ठीक 9 बजे एप्लीकेशन लिख कर अपन आईटीबीपी सेंटर रिकोन्ग पीओ पहुंच गए, यहां पता चला SM (सूबेदार मेजर) साहब अभी कार्यक्रम में व्यस्त हैं, इन्तजार करते 10.30 बजे वो अवतरित हुए, पूरे ठसक के साथ उन्होनें कहा पहले DC ऑफिस की परमिशन लाओ. यहाँ एक बात बता दूं शिपकिला की परमिशन मिलना कोई खेल नहीं है 100 मे कोई एक दो परमिशन ग्रांट की जाती हैं वो भी जिनका आईटीबीपी मे शानदार जुगाड़ हो. मरता क्या ना करता मैं DC ऑफिस दौड़ा, वहां पता चला ये अधिकारी महोदय भी गायब हैँ, इंतजार करते हुए 1.30 घंटे बीत गए कोई हलचल ना हुई, 12 बजे मैंने सोचा अब यहां समय देना बेवकूफी है. चार घंटा बिना खाए धरना देकर कोई फायदा ना होता देख 12.30 बजे मैं नाको के लिए निकल पड़ा जो यहाँ से कोई 120 किलोमीटर था.

 

मन मे सोचा अब चीन को लिपू लेख से ही देखूँगा . रिकोन्ग पीओ से बढ़ते हुए आपको वो ही NH 5 मिलता है लेकिन 5,10 किलोमीटर पर ही आपकी सारी खुशी रास्ते की मिट्टी में मिल जाती है. यहाँ से पूरे रास्ते में भूसा भरा हुआ है, यहीं पर बोर्ड दिखता है कि आप दुनिया के सबसे दुर्गम रास्ते पर चल रहे हैं, ये बोर्ड थोड़ी हिम्मत बड़ा देता है, PANGI, MURANG होकर पूह पहुंचते हैं, रास्ते ने वैसे ही भूसा भर दिया था, यहां फिर शिपकी ला के लिए आईटीबीपी मे कोशिश करी, अबकी उन्होंने कह दिया ये परमिट तो रिकोन्ग पीओ से मिलेगा , मैंने कहा अपने खवर भंग फुलाओ और फिर नाको की तरफ बढ़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था, तो फिर मै नाको की तरफ बढ़ गया, यहां से नो नेटवर्क ज़ोन लग गया शायद BSNL चल रहा हो, लेकिन मेरे दोनों सिम गायब हो गए. रास्ते मे शिपकी ला के बोर्ड को बड़ी हसरत भरी नजरों से देखा. चीन तिब्बत मात्र 31 किलोमीटर दूर था, लेकिन मैं नहीं जा सकता था, बहुत भूषा भर गया था एक तो मैने अपनी 4 घंटे सुबह बर्बाद कर दिए थे इसके पास मे. पूह से पहले एक चेक पोस्ट पड़ती है जहां आपको एंट्री करानी होती है, और विदेशी मेहमानों को अपना INNER LINE PERMIT दिखाना होता है. शिपकी ला के बोर्ड को 5 मिनट देखने के लिए बाद अपन बढ़ चले नाको की तरफ. सोचा अब लिपू लेख से ही कभी मौका मिलेगा.

इसी रूट पर जब आप बढ़ते जाते हो तो नाको से 40 किलोमीटर पहले ख़ाब पड़ता है, इस जगह की खासियत ये है कि चीन से भारत मे आने वाली सतलुज और स्पिती से आने वाली स्पिती नदी यहीं पर मिल जाती हैं, यहां ख़ाब का पुल है. प्रकृति इंसानी बार्डर नहीं देखती. शाम के 4 बज चुके थे ख़ाब बस एक पुल भर है, कहने को एक ढाबा है यहाँ, रुक कर चाय का ऑर्डर दिया ब्लैक टी, क्यूंकि दूध वली चाय को मैं सुबह झेल चुका था, असल में चाय बातचीत स्टार्ट करने का बहाना होती है. यहाँ से सीधे फिर हम नाको की तरह निकल पड़े, ठंड बढ़ चुकी थी तापमान कोई माइनस 3, 4 रहा होगा. खाब से नाको की रोड बहुत कर्व लिए हुए है जैसा कर्व हम ने नेपाल में BP हाईवे मे देखा था. 5 बजे के करीब मैं नाको पहुच गया,ये तो एक गाँव निकला. नाको 3700 मीटर की हाईट मे है , यहां से रास्ते पर बर्फ दिखनी शुरू हो गई थी. खाब मे होटल वाले ने बताया था कि नाको मे पानी नहीं है सारा पानी जम गया है. खैर यहां पहुच कर होटल खोजे तो पता चला यहां होटल 4 महीने के लिए बंद हो गए हैं, सिर्फ एक होटल लेक व्यू ही है पूरे नाको मे जो खुला है, ये होटल नाको झील के सामने है बिल्कुल. बाकी सुबह नाको मोनेस्ट्री  देखेंगे.और समय रहते काज़ा जो यहां से लगभग 100 किलोमीटर है के लिए निकला जाएगा. रास्ते मे धनकर, ताबो, ग्यू मोनेस्ट्री देखी जाएगी. नाको का अभी का तापमान – 5 डिग्री है, तो आज की डायरी यहीं तक बाकी कल तक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *