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गैस है भई गैस है

अगस्त 12, 2018 कमल पंत

कहीं दूर जब दिन ढल जाए नमो जी आयें भाषण सुनाएँ और दिमाग की बत्ती गुल हो जाए.पत्रकारिता में सम्मान नहीं दिया जाता,मने श्री श्रीमान नहीं लगाया जाता मगर सभी पत्रकारिता के नियमों को ताक में रखते हुए मैं मोदी नाम के आगे श्री मोदी जी लिखता हूँ. मजाक है भई इतने कांफिडेंस के साथ लाखों की भीड़ को संबोधित करना. क्या कमाल का विवरण दिया है गैस का,मतलब गैस नहीं हो गयी अलादीन का खजाना हो गया ,निकल आएगा.

तो सुनो कहानी मोदी जी की ज़ुबानी,”गुजरात में एक स्कूटर में ट्रेक्टर के बड़े टायर को लाद कर कोइ ले जा रहा था,अब कोइ समझदार आदमी खाली ट्यूब ले जाता वहां ले जाकर हवा भर लेता, हमने गाडी रुकवाई और पूछा उससे कि भई ये जो तू ले जा रहा है एसे क्यों ले जा रहा है एक्सिडेंट होगा चोट लग जायेगी ,उसने कहा मेरे घर का कचरा और दो गाय पाल रखी हैं उनका गोबर मिलाकर मैं गैस उत्सर्जित करता हूँ,प्लांट लगा रखा है.इस ट्यूब में वही गैस भरी है,खेत ले जाऊंगा,पम्प चलेगा ‘

पोसिबल है भई ,बिलकुल पासिबल है,नाट पोसिबल जैसा कुछ नहीं इस देश में,वैसे भी अपने देश की जुगाड़ टेक्नोलोजी की तारीफ़ तो मैं न जाने कब से कर रहा हूँ, वर्ल्ड बायो फ्यूल डे पर बोलते हुए  मोदी जी ने कमाल कर दिया,मतलब गजब,सभी को अपने पीएम के मुंह से एसी जुगाडू कहानी सुनकर गर्व की अनुभूति हुई होगी. मोदी जी में गजब कान्फिडेंस है भई इसलिए तो मैं उनके नाम के आगे श्री लगा रहा हूँ . वैसे जिस जिस को डाउट हो वो ये देख लेना  24 मिनट बाद और हाँ भाजपा के यूट्यूब चैनल से ही लिया है. वैसे हमारी मोदी जी से ख़ास रिक्वेस्ट है की क्यूँ ना उस आदमी को और उसकी गैस बनाने वाली टेक्नोलॉजी को दिल्ली ले आएं , यहाँ कचरा बहुत है और चाय बनाने वालों की तादाद भी काफी है. एक तरफ कचरा गायब दूसरी तरफ चाय वालों की बचत .

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