गंभीर अड्डा

गारिंचा- ड्रिब्लिंग का बादशाह

जुलाई 13, 2018 Girish Lohni

पेले. दी ग्रेट पेले का नाम तो सुना ही होगा. पेले ब्राजील ही नहीं विश्व का अब तक का सबसे महान खिलाडी है. पेले के खेलते हुए ब्राजील 1958, 1962 और 1970 का फुटबाल विश्व कप जीता था. पेले वो नाम है जिसने विश्व में सबसे ज्यादा फुटबाल वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम में खेला है. लेकिन पेले खुद से भी ज्यादा महान गारिंचा को मानते थे.

मेनुएल फ्रानसिस्को डोस सेंटोस. विश्व का वो फुटबाल खिलाड़ी जिसने फुटबाल ड्रिबलिंग की एक नई पीढ़ी को जन्म दिया. इस पीढ़ी में मेरोडोना, रोनाल्डो, मैसी से लेकर नेमार जैसे बड़े नाम शामिल हैं.  ब्राजील का वो खिलाड़ी जिसे दुनिया गारिंचा के नाम से जानती है. गारिंचा एक पुर्तगाली शब्द है जिसका अर्थ एक छोटी सी चिड़िया है, यह नाम उसकी बहन ने उसे दिया. गारिंचा एक बेहद गरीब परिवार में पैदा हुआ था. जिसके पिता शराबी थे. गारिंचा का जन्म से ही बाँया पैर छः सेन्टीमीटर छोटा था. उनका मेरुदंड विकृत था. लेकिन ये कभी गारिंचा के खेल में बाधा नहीं बनी.

गारिंचा का कद छोटा था लेकिन गारिंचा के पास गति नियंत्रण स्किल और दिमाग था और सबसे महत्तवपूर्ण लोगो को मनोरंजन प्रदान करने का उसका हुनर था. 1958 के फुटबाल विश्व कप में ब्राजील ने स्वीडन को 5-2 से हराया. विश्व के सबसे रोमांचक फुटबाल मैच मे यह मैच भी शामिल है. यह विश्व कप इतिहास में खेले गये उन चंद मैच में है शामिल है जिसमें पहले बढ़त हासिल करने के बाद भी कोई टीम हारी हो. यह पहला विश्व कप था जो कि यूरोप में खेला गया और जीतने वाली टीम यूरोप से बाहर की थी.

1958 के विश्व कप के फाइनल से पूर्व हुई पत्रकार वार्ता में स्वीडन के कोच ने ब्राजील के खिलाड़ियों की शारीरिक अक्षमता का मजाक उड़ाया. मैच के पहले तीन मिनट स्वीडन द्वारा किये गोल ने उसके इरादे बता दिये थे इसके बावजूद ब्राजील 5-2 मुकाबला जीत गया. विंगर की पोजिसन में खेलने वाले गारिंचा का पेले को दिया क्रास पास किस फुटबाल प्रेमी को याद नहीं होगा. पहले दो और फिर तीन डिफेन्डर को चीरते गारिंचा के क्रास पास पर खुद स्वीडन के राजा ने खड़े होकर तालियाँ पीटी थी.

गारिंचा अपने जीवन को लेकर कितने बेफिक्र थे इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गारिंचा को 1959 में ब्राजील और इंग्लैंड के बीच हुए दोस्ताना मैच के दौरान इसलिए बाहर रखा गया कि उनका वजन ज्यादा हो गया. गारिंचा का अपने खेल से कितना लगाव था उसका अंदाजा भी इस बात से लगाया जा सकता है कि 1962 के फुटबाल विश्व कप में गारिंचा को न केवल सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब मिला ब्लकि अकेले गारिंचा के दम पर ब्राजील यह विश्व कप भी जीत गया.

पेले और गारिंचा की जोड़ी ने लगभग पचास से ज्यादा फुटबाल मैच खेले. खास बात यह है कि जब कभी भी यह जोड़ी ब्राजील की ओर से साथ में उतरी ब्राजील कभी मैच नहीं हारा. गारिंचा के खेल की खासियत यह थी कि वो दर्शकों का मनोरंजन करना कभी नहीं भूलते थे. गारिंचा की ड्रिब्लिंग का पूरा विश्व दिवाना है. गारिंचा न केवल मैदान में दर्शकों का मनोरंजन करते थे बल्कि मैदान के बाहर अपने साथी खिलाडियो को भी खूब हँसाते थे. उनके कुछ साथी खिलाड़ियों के अनुसार गारिंचा को कई बार खेल खत्म होने के बाद दुसरी टीम का नाम पता चलता था.

गारिंचा का करियर 1956 के बाद लगातार गिरता चला गया. व्यक्तिगत जीवन में भी गारिंचा शराब की गिरफ्त में होते चले गये. जैसे-जैसे गारिंचा के जीवन में फुटबाल कम हुआ उनकी शराब बढ़ती गयी. कभी मनोरंजन के लिये शराब पीने वाला गैरिंचो अब अवसाद में शराब पीने लगा. शराब के कारण गारिंचा के व्यक्तिगत जीवन में इतने पचड़े हुए कि 1983 में उनकी मौत पर सभी को लगने लगा की गारिंचा की अंतिम यात्रा में कोई शामिल नहीं होगा.

लेकिन ब्राजील ने जॉय ऑफ पीपल के नाम से मशहूर अपने इस प्यारे खिलाड़ी को उसकी अंतिम यात्रा पर भावपूर्ण विदाई दी. गारिंचा को भले आज विश्व के महान खिलाड़ियों की सूची में शामिल न किया जाये पर आज भी किसी खिलाडी को उसकी शानदार ड्रिब्लिंग के लिये कोई उपमा दी जाती है तो वह है गारिंचा जॉय ऑफ पीपल.

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