गंभीर अड्डा

बापू के बाद भारत की असल तस्वीर

अक्टूबर 2, 2018 ओये बांगड़ू

महात्मा गांधी के जाने के सालों बाद भी भारत की तस्वीर वैसी नहीं बन पाई जैसी ‘बापू’ ने सोची थी.  वैसे देशवासी शुरू से ही समाजवाद को मानने से इनकार करते आए थे फिर भी थोड़ा सा तो था ही.  धीरे धीरे समय के साथ पैसे वाले और गरीब दो धुरी बन गए.

जैसे मुगलो लोदियों और उससे पहले के राजाओं के समय होता था. राजा अपने आस पास रहने वाले अमीरों की जेब मे रहा करता थे .उसकी नीतियां पहले अमीरों के लिए थी बाद में जाकर कहीं जनता के लिए कुछ पहुंचता था.

रेत और आम जनता की यह तस्वीर असली भारत को बखूबी दिखा रही है. जितना रेत का ढेर इस फ़ोटो में है उतना ही पैसा देश मे मौजूद है. मगर दिक्कत ये है कि देश को चलाने वाले बंटवारा कैसे करें ?  तो उन्होंने अपने मजदूरों को धीरे धीरे थोड़ा थोड़ा बांटने को बोला है.

नही समझे, एक एक मजदूर तसले में थोड़ा थोड़ा जो ले जा रहा है वह जनता के लिए है और जो ढेर है उसे कहीं ले जाने की जरूरत नहीं , अपना ही तो है.

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