गंभीर अड्डा

गांधी चाहिए या गोडसे ?

जनवरी 30, 2019 ओये बांगड़ू

तीस जनवरी को आप किस तरह याद करते हैं,गांधी के वध का दिन या एक अहिंसा के समर्थक की दुखद हत्या का दिन,सोशल मीडिया गांधी के बारे में क्या क्या कहने लगा है यह देखकर बर्बस ही उस महात्मा की बात याद हो आती है जो कहता था कि आज से पचास साल बाद जब किसी से कहा जाएगा कि एक आदमी हथियार के रूप में अहिंसा का इस्तेमाल करता था तो वह पीढी इस बात का मजाक उड़ाएगी.

खैर अलीगढ़ का एक वीडिओ वायरल हो रहा है धीरे धीरे,भगवा पहने कुछ लोग गांधी की तस्वीर में गोली मार रहे हैं और नारे बुलंद कर रहे हैं कि महात्मा नाथूराम गोडसे अमर रहें. क्यों ? क्या कभी इसका उत्तर ढूंढ पाए आप लोग.कि एसे लोग किस तरह उपजते हैं,क्यों इन्हें नाथूराम सच्चा लगता है और क्यों इन्हें महात्मा गांधी झूठा प्रतीत होता है. क्या एसी वजह है कि इन लोगों को लगता है कि एक लगभग अस्सी साल का बूढा देश के लिए भारी संकट था और एक छत्तीस साल का सनकी जवान महात्मा है. आखिर क्यों ये लोग महात्मा गांधी के अहिंसा के रास्ते को मजाक सोचते हैं और गोडसे की हत्या को जायज ठहराते हैं.?

गांधी की फोटो पर उनकी जयंती के दिन गोली चलाने वाली यह महिला हिन्दू महासभा की राष्ट्रीय सचिव बताई जा रही है,नाम है पूजा शकुन पांडे. एक कार्यक्रम में गांधी की फोटो को गोडसे के अदाज में गोली मारकर जाने क्या साबित करना चाहती हैं.

वैसे सभी गोडसे समर्थक अब तक इस बात का कोइ तार्किक उत्तर नहीं दे पाए हैं कि आखिर गोडसे सही कैसे है? हर बार वह यही पीपली बजा देते हैं कि गांधी देश को बेचने निकल पड़े थे,या गांधी पकिस्तान समर्थक थे,या गांधी नेहरू को मजबूर कर रहे थे कि वह पकिस्तान को पैसे दे दे.मगर हकीकत में एसा कुछ नहीं था,मगर गोडसे समर्थकों के लिए यह तर्क ही सब कुछ है,क्योंकि इसमें फर्जी राष्ट्रवाद दिखता है,देश के लिए किया गया कृत्य नजर आता है,वह कमी पूरी होती है जो अक्सर गांधीवादी संघियों पर आरोप लगाते हैं कि तुम्हारे पास कोइ स्वंत्रता सेनानी नहीं है,तो वह उनके सामने एक एसा आदमी रखने की कोशिश करते हैं जिसने देश बेचने वाले को मारा,मगर उनकी किस्मत खराब है,क्योंकि इतिहास के दोनों पहलू सबके सामने हैं.

गोडसे के कृत्य सबके सामने हैं,वैसे भी हर एक हत्यारा कोर्ट में खुद को इनोसेंट साबित करने में लगा रहता है,हर हत्यारा कहता है कि उसने हत्या इसलिए कि क्योंकि ‘……’ और इस क्योंकि के बाद उसके बाद एक एसा उत्तर होता है जो उसे इनोसेंट बता देता है,मगर क्या हम हर हत्यारे को इस क्योंकि के कारण इनोसेंट मांग लेंगे.

हमें जरूरत किसकी है ? गांधी की या गोडसे की. एक अहिंसा के पुजारी की या एक हत्यारे की ?

संघी तो कहते रहेंगे कि हमने गोडसे चाहिए मगर आम भारतीय को खुद तय करना होगा उसे क्या चाहिए

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