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अलविदा जॉर्ज फर्नांडीज: पढ़िए कुछ खास किस्से

जनवरी 29, 2019 ओये बांगड़ू

पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिज आखिरकार इस दुनिया से विदा हो गए। उनकी मृत्यु  की खबरें हालांकि लगातार आती रही , मगर इस बार वाली मृत्यु एकदम सच वाली है। जार्ज फर्नांडिज को हम कैसे याद करेंगे, एक 2000 में पैदा हुए और अब जाकर 19 साल के हुए एक लड़के ने मुझसे जब यह सवाल पूछा तो मैने उसे कहा कि तुंहर होश सम्भालने तक तो जार्ज दुनिया के सामने गायब हो चुके थे। तुम कैसे याद करोगे.

फिर भी एक कोशिश की जा सकती है कि आखरिकार जार्ज को कैसे याद किया जाए।

कुछ किस्सों के माध्य्म से मैंने उसके मन मे जार्ज की वह इमेज बनाने की कोशिश की जो मेरे मस्तिष्क में कभी बनी थी

जार्ज फर्नांडिज अपनी जवानी के दिनों में एक जबरदस्त नेता के रूप में उभरे, मुंबई में लोकसभा चुनाव में वहां के दिग्गज नेता एसके पाटिल को हराने वाले जार्ज को मुंबई का बादशाह घोषित किया गया। जार्ज के सहयोगी बताते हैं कि इसी चुनाव में जब पाटिल से पूछा गया कि उनकी टक्कर में कोई नेता खड़ा हुआ है तो एसके पाटिल का जवाब था कि अब तक उन्हें हराने वाला पैदा नही हुआ , जार्ज ने उस पाटिल को हराकर न सिर्फ उसका दम्भ तोड़ा बल्कि भारतीय राजनीति में एक जबर्दस्त दस्तक भी दी।

दूसरा किस्सा याद आता है रेलवे की हड़ताल का, अखिल भारतीय रेलवे स्ट्राइक करवा पाने में सक्षम जार्ज फर्नाडीज ने देश को बताया कि मजदूर को भी उसकी पूरी मेहनत मिलनी चाहिए, सरकार ने रेलवे कर्मचारियों की तनखा 3 वेतन आयोग के बाद भी नही बढ़ाई लेकिन जार्ज ने अखिल भारतीय स्ट्राइक कराकर रेलवे मजदूरों की ताकत का एहसास करा दिया।

तीसरा किस्सा आता है दिल्ली का, जब जार्ज ने गृह मंत्री के आवागमन से चिढ़ कर अपने घर का गेट ही उखाड़ फेंका।

तत्कालीन गृहमन्त्री जब भी संसद के लिए आते जाते थे,तो उनके सुरक्षाकर्मी जार्ज फर्नाडीज का गेट बंद करके उसके सामने खड़े हो जाते थे, क्योंकि जार्ज कोई सुरक्षा नही लेते थे इसलिए जार्ज ने रिंच लेकर खुद ही पहले अपने गेट उखाड़ फेंके फिर संसद में आकर बताया कि एक देश का मंत्री इस कदर डर रहा है कि अपने पड़ोसी सांसद को नजरबंद कर देता है अपने आते जाते वह देश का क्या सोचेगा। उसके कुछ साल बाद वह देश की कैबिनेट मंत्री बने और तब भी कोई सुरक्षा नही ली।

संसद पर हमले के बाद उनके गेट के बाहर दो गार्ड खड़े कर दिए गए, हालांकि वह मन से इसके खिलाफ थे मगर उनसे कहा गया कि हमला जार्ज पर होने की संभावना नही, देश के रक्षा मंत्री पर होने का खतरा है इसलिए सुरक्षा देश के रक्षा मंत्री को दी गई है।

जिस बात का दम्भ आज कई नेता भरते हैं कि उन्हें सुरक्षा नही चाहिए, वगेरह वगेरह। उस बात को जार्ज ने खुद में अपनाया था। बिना किसी सुरक्षा के जार्ज अपने बंगले में रोजाना सैकड़ों लोगों से मिला करते थे, उनके दरवाजे सबके लिए खुले थे

जार्ज फर्नाडीज के अकाउंट में 17 करोड़ रुपये थे, ऐसा इलेक्शन डिक्लिरेशन में साबित हुआ, तो इस पर बहुत हंगामा मच गया था। वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा अपनी पोस्ट में लिखते हैं कि, जार्ज की माँ उन्हें ईसाई पादरी बनाना चाहती थी पर वह कभी चर्च नही गए, अपने बच्चे के भविष्य को लेकर चिंतित उनकी माँ ने अपनी जमा पूंजी से बंगलोर में उनके नाम एक सम्पति खरीदी, बाद में जब बंगलोर डेवलप होना शुरू हुआ तो सरकार ने वह सम्पति अधिग्रहित कर ली और उसके मालिक निकले जार्ज फर्नाडीज। इस तरह जार्ज बने 17 करोड़ के मालिक। इसके अलावा जार्ज ने अपनी जिंदगी में बस अपने तेवरों की वजह से ही पहचान पायी.

जार्ज फर्नाडीज भले ही अब चले गये हो, मगर उपरोक्त किस्सों को पढ़कर आज के युवा ये अंदाज लगा सकते हैं कि जार्ज किस कद के नेता थे और किस कदर अपने कर्म के प्रति समर्पित थे, एक दफा उन्हें जब हॉस्पिटल में भर्ती करना था तो वह हॉस्पिटल जाने के लिए अड़े थे, उनके ड्राइवर ने उन्हें गाड़ी में बैठाकर एक चक्कर उस एरिया का लगाया और वापस उन्हें हॉस्पिटल छोड़ दिया। एक जुझारू जनता को समर्पित नेता पर आरोप भी लगे, मगर ये तो नियति है। चंदन पर विष से भरे भुजंग भी होते ही हैं।

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