गंभीर अड्डा

ईह तुम्हरा सौभाग्य है, हमरा नहीं

अक्टूबर 1, 2016 सुचित्रा दलाल

ओएबांगड़ू ईह  तुम्हरा सौभाग्य है, हमरा नहीं…..!
गंगाजल?
हाँ रे बांगड़ू गंगाजल।
केतना मेहनत कर के जाते हो गंगाघाट गंगाजल लाने याद है के सब भुलाई दिया ? हाँ-हाँ याद है, बहुते धौजनि होता है रे, हालत ख़राब हो जात है, आ भीड़ का तो पूछो मत, जैसे लगता है कि गंगाजल नहीं इच्छा शक्ति का बरदान मिल रहा हो।
लेकिन फिर भी लाना तो पड़ेगा न? एकठो गंगाजल ही तो है जो सब कुछ को पवितर करे खातिर घर में रखते हैं।
बांगड़ूआ  तो आज जब खुदे गंगा मैया तोहरे घर अइहे तो काहे भाग रहे हो इस गंगा जल से? भागो नाही गंगा मैया तोहरे घर तोहरा ख़ुशी देबय खातिर आयी हैं धैर्य रखो। स्टॉक में रख लो भर-भर के। आज त तोहार घर-आँगन, बर्तन-चौका सब पवितर हो गइल। ख़ुशी मनाओ की गंगा मैया तोहरा दुआर आई हैं, ई तुम्हरा सौभाग्य है, हमरा नहीं रे बंगडुआ।

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