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फिर आ रहे हैं किसान दिल्ली

नवंबर 28, 2018 ओये बांगड़ू

आने वाले दिनों में किसान फिर से दिल्ली की तरफ पहुंचने वाले हैं, वही 200 किसान सन्गठन इस बार भी दिल्ली में प्रदर्शन के लिए आ रहे हैं। 2 अक्टूबर के पहले भी आये थे, याद आया, जब 2 अक्टूबर का बहाना बनाकर बॉर्डर पर ही रोक दिया था, बॉर्डर से ही गेट आउट करवा दिया था। एक् बुजुर्ग से किसान की लाठी से बंदूक से लड़ने की फोटुक वायरल हुई थी। हां आपकी याददास्त कमजोर है न मगर किसानों की परेशानियां कमजोर नही है। बहुत मजबूत हैं।और इन मजबूत परेशानियों को कमजोर करने की मांग को लेकर 29 30 को पहुंच रहे हैं हमारे किसान।
आपको क्या लगता है उन्हें कोई काम धाम नही है, मुंह उठाया और आंदोलन करने पहुंच गए, यही सोचते होंगे न आप। सच बताइये, तभी तो आपको लगता है कि ये किसान आज तक कहाँ थे 60 सालों में क्यों नही आये वगेरह वगेरह। लेकिन आप क्या जानें ये तो कबसे आ रहे हैं , लगातार आ रहे हैं, मगर अब ऐसी हालत है कि सब बस से बाहर हो गया है इसलिये एक् बार फिर जोर आजमाइश के लिए आ गए हैं।पहले क्या है कि आते थे तो थोड़ी बहुत परेशानी हल हो जाती थी,एक् दफा कांग्रेस ने तो लोन भी माफ करवा दिया था, हालांकि उसके लिए भी आना पड़ा था प्रदर्शन करने। मगर इस सरकार में कुछ न हो रहा।
वैसे किसान ज्यादा कुछ नही चाहते,एक प्रोफेसर स्वामीनाथन की कमिटी बनाई गई थी,किसानों के हालात की समीक्षा के लिए,उस कमिटी ने 2004 से 2006 के बीच अपनी रिपोर्ट पेश करी थी संसद में। ये सोचकर कि जल्द ही कुछ हल निकलेगा।
मगर मनमोहन बाबू तब खामोश थे,स्वामीनाथन की रिपोर्ट पर संसद में प्रॉपर चर्चा तक नही होकर दी। किसानों के साथ तगड़ा मजाक बनकर रह गई स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट।किसान चाहते हैं कि उस रिपोर्ट को संसद के पटल पर रखा जाए और उस पर चर्चा हो। बेहतर नीति बनाई जाए।
पी साईनाथ एक टीवी रिपोर्ट में बता रहे थे कि किसानों के साथ सबसे बड़ा मजाक इस सरकार ने किया है,फसल बीमा योजना लाकर,बीमा योजना से बैंक और इंश्योरेंस कम्पनी को तो तगड़ा मुनाफा है, मगर किसान के हाथ कुछ नही आया।
बैंक से लोन लेने वाले किसानों का होता है फसल बीमा,अब बैंक जो है किसान को देता है फसल के लिए लोन,और इंश्योरेंस करती है इंश्योरेंस कंपनी,फसल अगर डूबती है तो इंश्योरेंस कम्पनी बैंक को पैसा चुकायेगी,न कि किसान को।किसान के नुकसान की कोई चर्चा नही। और अगर फसल अच्छी होती है तो किसान लोन चुकाएगा ही चुकाएगा बाकी सरकार इंश्योरेंस कम्पनी को जो पैसा दे रही है वो उसकी जेब मे।
खैर सच मे किसानों के मुद्दों को समझने और उनको हल करने का सही वख्त आ गया है।
रिलायंस गन्ने के चार टुकड़े बेचता है 70 रूपये में बड़े बड़े माल में पैक कराकर, और किसान को मिलता है 2500 रूपया टन, मोटा मोटी हिसाब लगाओ तो गन्ना किसान को जिस गन्ने पर एक् टन में 2500 मिलता है, रिलायंस उससे 50 60 लाख रुपया कमाता है ।तो क्या खेती का भी व्यापारीकरण करना होगा?? जो भी करना होगा उसके बारे में विस्तार से चर्चा जरूरी है। इसलिए आ रहे हैं 29 30नवम्बर को किसान।

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