यंगिस्तान

फिल्म रिव्यू :मुबारकां

जुलाई 30, 2017 कमल पंत

निर्देशक अनीज बज्मी ने फिर से सरदार वाली फिल्म बनाई है नाम है मुबारकां, वैसे सिंह इज किंग के बाद अनीज बज्मी साहब शायद सरदार को फिल्म में कम्पलसरी मानने लगे हैं, अगर आपने सिंह इज किंग देखी होगी तो आपको याद होगा कि डायलोग एकदम अलग कलेवर में बोले जाते रहे हैं. जैसे हैप्पी सिंह की इंट्री के बाद डान की लाईफ चेंज हो जाती है सब गुड गोबर हो जाता है सब मिक्स्म मिक्स हो जाता है कन्फ्यूजन बड़ता है बड़ता है बड़ता है और लास्ट में क्लाईमेक्स में सब सेटल तो वैसा ही मुबारकां में भी हुआ है.

आन ए सिम्पल नोट इतना ही कहूंगा कि बज्मी साहब ने सिंह इज किंग को रीराईट किया है और थोड़ा गूगल करके अलग अलग किरदार भरे हैं. मने डाइरेकश्न में . कहानी तो अलग अलग ही हैं दोनों.

तो मुबारकां में क्या होता है कि अर्जुन कपूर स्क्वायर (अर्जुन कपूर का डबल रोल है ना ) के मम्मी पापा जो हैं एक कार एक्सीडेंट में मर जाते हैं. अब जिम्मेदारी आ जाती है चाचू अनिल कपूर पर. मगर अनिल कपूर अपनी जिम्मेदारी से भगते हुए दोनों को दो अलग अलग घरों में फिट कर आते हैं. एक को रख आते हैं लन्दन अपनी बहन के यहाँ और दुसरे को रख आते हैं पंजाब अपने दुसरे भाई के यहाँ. अब दोनों बच्चे जो हैं जवान होते हैं.’हुए छोकरे जवान रे’.  यहाँ तक सब आलमोस्ट ठीक रहता है. हल्का फुल्का माहौल है बढिया है. फिर दोनों की शादी की बातें चलती हैं और दोनों सेपरेटली अलग अलग लड़कियों से प्यार करते हैं. एक सुनील शेट्टी की बेटी से करता है और दूसरा एलियाना डिसूजा से.एलियाना कुछ जगहों पर कमाल खूबसूरत लगी हैं, क्योंकि अब उनका वो रूखा सूखा वाला फिगर रहा नहीं न, अब वो थोड़ी सी अच्छी लगने लगी हैं (एकदम पर्सनल वाली राय )

हाँ तो इसके बाद अनीज साहब ने वही सिंह इज किंग वाली स्टाईल में जम कर कन्फ्यूजन में कामेडी पैदा की है और अपनी ही तरह के डायलोग बुलवाए हैं किरदारों से ‘क्या चाचू बंद घड़ी में कौन अलार्म लगाता है ‘ ‘नशा तो उड़ता पंजाब ”10.25 में सुबह सार्प भाग जाना ‘. आपको इसी कन्फ्यूजन से पैदा हुई कामेडी में बहुत सारा मजा आने वाला है. बाकी अगर अनिल कपूर की एक्टिंग देखनी है तो मत जाना,क्योंकि उन्होंने अपने पुराने स्टाईल को दोहराया है ‘झक्कास ‘ कुछ नया नहीं किया सरदार के किरदार में लेकिन हाँ उम्र के इस पडाव में उनकी जवानी काबिले तारीफ़ और काबिले गौर है.

बाकी अर्जुन कपूर डबल रोल में ठीक लगे हैं,एलियाना और अथिया बहुत खूबसूरत लगी हैं इसके अलावा उनके लिए फिल्म में कुछ ख़ास था नहीं, बाकी चरित्र किरदारों ने अपना कम बखूबी किया है. लोकेशन बड़ी जबर्दस्त चुनी गयी हैं, कैमरा वर्क सीखने लायक है मतलब हम जैसे न्यू कमर उसे देख कर बहुत कुछ सीख सकते हैं . खासकर ये कि कैसे फ्रेम में लोकेशन के सही सही एंगल लिए जाने चाहिए.

हाँ म्यूजिक तो भूल ही गया,नाचने गाने वाले गाने मस्त हैं एक गाने को मिक्का से गवा कर खराब कर रखा है, वो गाने के बोल हैं ‘हवा हवा ,ओ हवा खुशबू लुटा डे ‘ इस गाने को आरिजनल रहने देते तो कसम से बहुत ही मजा आ जाता, बाकी पिच्चराईजेशन तो अच्छा ही हुआ है गानों में

मुबारकां एक बार देखनी तो बनती है.कम से कम कैमरा चलाना सीखने के लिए ही सही .

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