गंभीर अड्डा

बहुरूपिया के अलग अलग रूप देखने का मौका

अक्टूबर 4, 2018 ओये बांगड़ू

भारत में एक समय था जब गली गली, गाँव गाँव अजब रूप धारण किए बहरूपिया  घुमा करते थे . कभी कोई रूप डराता था तो कभी हँसता था. अक्सर भगवान के अलग अलग रूप धारण किए यह बहरूपिया आस्था की नजरों से देखें जाते थे . बच्चों से लेकर बड़ों तक का हुजूम उस अजब शख्स के गज़ब रूपों  को देखने के लिए जुट जाया करता. पहले इन्हें राजाओं महाराजाओं ने सहारा दिया फिर आम लोगों ने सरहाया. लेकिन बदलते समय और समाज के साथ रूप बदल कर जीने वालों की तादाद कुछ इस कद्र बढ़ी है कि रूप बदलने का सांग करने वाले इन कलाकारों का अस्तित्व खतरें में पड़ गया.

अलग अलग चेहरों का नकाब ओढ़ कर जीते लोगों के बीच आज भी यह असली बहरूपिया अपनी कला को बचाएं रखने की जदोजेहद में लगे है. हालांकि अब जब यह अपनी कला दिखाने निकलते है तो बमुश्किल ही इन्हें इनकी कला के कद्रदान मिल पाते हैं. कभी मनोरंजन का अहम जरिया रहे बहरूपिया आज टीवी और मोबाइल की दुनियां में अपनी पहचान खोते जा रहे हैं.

अनेक रूप धरने वाले कलाकारों की इस खुबसूरत कला को बचाने की कोशिशें अब भी जारी हैं. ऐसी ही एक कोशिश की जा रही है “द नेशनल बहुरूपिया फेस्टिवल” के जरिए. इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र में 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2018 तक चलने वाले इस फेस्टिवल में  ना सिर्फ कई गजब बहरूपिया देखने का मौका मिलेगा बल्कि फोटोग्राफी कॉम्पीटिशन, सेल्फी कॉम्पीटिशन और फैंसी ड्रेस जैसे कॉम्पीटिशन में भाग भी ले सकते हैं.टाइमिंग है शाम 4 बजे से 8:30 बजे. एंट्री फ्री रखी गयी है तो इस ऐतिहासिक कला को देखने जरूर जाएं.

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *