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राजनैतिक चंदे में सब नंगे

मई 31, 2018 Girish Lohni

पिछले एक साल में आपकी आय में कितनी वृध्दि हुई है? एक प्रतिशत दो प्रतिशत तीन चार दस? आप अपनी आय में इस वर्ष कितने प्रतिशत वृध्दि की उम्मीद कर रहे हैं? दस पंद्रह बीस तीस पैतीस?

अब सुनिये भारत की बड़ी राजनैतिक पार्टियो की आय में हुई वृध्दि का आकडा. 2015-16 अपेक्षा 2016-17 में राजनैतिक पार्टियों के चंदे में 478% की वृध्दि दर्ज की गई है. भारतीय जनता पार्टी के चंदे में 593% की वृध्दि दर्ज की गई है. तृणमूल कांग्रेस के राजनैतिक चंदे में 231 फीसदी की वृध्दि, सीपीएम व कांग्रेस के चंदों में यह वृध्दि क्रमशः 190% व 105% की वृध्दि हुई है. राजनैतिक चंदे के संबंध में एसोसियेशन पर डैमोक्रेटिक रिफाम्रर्स (एडीआर) ने रिपोर्ट जारी की है जिसमें ये सभी आँकड़े उजागर हुये है.

चिंता का विषय यह है कि एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार राजनैतिक पार्टियों को प्राप्त कुल चंदे का 45.59% हिस्सा अज्ञात स्त्रोत से मिला है. भाजपा को प्राप्त कुल अज्ञात स्त्रोत से प्राप्त चंदे का लगभग 99% हिस्सा स्वैच्छिक योगदान से व कांग्रेस का 91% हिस्सा स्वैच्छिक योगदान से प्राप्त हुआ है.

मजे की बात यह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों को दान देने वाला सबसे बड़ा ट्रस्ट एक ही है. सत्या इलेक्ट्रोल ट्रस्ट ने भाजपा को 251.22 करोड़ ( कुल चंदे का 47.20%) और कांग्रेस को 13.90 करोड़ (कुल चंदे का 33% ) दिया है. सभी राजनैतिक पार्टियों को 589.38 करोड़ का मिला यह चंदा 2123 दानो मे प्राप्त हुआ है.

भाजपा व कांग्रेस दोनों को चंदा देने वाले ट्रस्ट सत्या इलेक्ट्रोल ट्रस्ट की बात की जाये तो उसे यह दान कुछ विशेष कंपनियों से प्राप्त हुआ है. जिसमें तीन कंपनियों टोरेन्ट ग्रुप की टोरेंट फार्मासुटीकल, जे.एस.डब्लू स्टील और जीएमएमसीओ ने चंदा दिया है. वर्तमान में टोरेंट ग्रुप नवीकरण उर्जा के क्षेत्र में, जे,एस,डब्लू स्टील क्षेत्र में और जीएमएमसीओ भारी मशीनों के निर्माण क्षेत्र में शीर्ष कंपनियों में हैं. इस वर्ष के बजट में आवंटित धन राशि पर नजर दौड़ाई जाय तो नवीकरण उर्जा क्षेत्र और आल-वैदर रोड़ जैसी महत्त्वाकांशी योजनाएँ देखेने को मिल जायेंगी.

एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार कुल चंदे में कार्परेट का योगदान दान दाताओं का प्रतिशत 95.56 प्रतिशत है. यदि राजनैतिक दलों को मिलने वाला चंदा ही कारपोरेट आधारित होगा तो कैसे सरकार की योजना किसान, गरीब, मजदूरी बेरोजगार के लिये बनेंगी. कुल मिलाकर देखा जाय तो इस भारत देश एक रंगमंच बन चुका है जिसमें दो हजार लोग सवा सौ करोड़ लोगों को कठपुतली बनाकर नचा रहे हैं.

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