गंभीर अड्डा

फर्जी खबरों का मकडजाल और पत्रकारिता भाग 4

दिसंबर 1, 2018 कमल पंत

वैसे तो रोज ही फर्जी ख़बरें अपनी जगह बना लेती हैं लेकिन 26 जनवरी के मद्देनजर कुछ फर्जी ख़बरें बहुत जरूरी हो जाती हैं जिन्हें जानना बेहद जरूरी है. क्योंकि इन ख़बरों को हर साल घुमा फिरा कर पेश कर दिया जाता है. जैसे डाक्टर अम्बेडकर के सम्बन्ध में और संविधान सभा के सम्बन्ध में इस दौरान बहुत सी ख़बरें बनाई जाती हैं जिनका सोर्स कोइ पुराने न्यूज पोर्टल का लिंक होता है. पिछले दिनों आरक्षण पर अम्बेडकर के एक वक्तव्य के सम्बन्ध में खबर चली थी कि ‘अम्बेडकर आरक्षण के धुर विरोधी थे’ और इस खबर की सत्यता के लिए संविधान सभा का जिक्र किया गया था. व्हाट्स फेसबुक पर चल रही इन ख़बरों की सत्यता के लिए अक्सर राजीव दीक्षित के कुछ उद्बोधनों का सहारा लिया जाता रहा है.

इसके अलावा भारत का झंडा तिरंगा विश्व में बना नम्बर एक, ये एक एसी खबर है जो सोशल मीडिया में आग की तरह हर राष्ट्रीय पर्व पर फ़ैल जाती है. इस खबर के अनुसार यूनेस्को ने इसे नम्बर वन कहा है या वोटिंग में इसे सबसे ज्यादा वोट मिले हैं..हालांकि दोनों में कुछ भी नही हुआ है .

उदाहरण बहुत सारे हैं लेकिन यहाँ मै सिर्फ उन खबरों का जिक्र कर रहा हूँ जो बहुत पापुलर हुए,जिनकी सच्चाई तक पहुंचा जा सका. एसा ही एक उदाहरण है कुछ वर्ष पहले जेएनयू में हुआ हंगामा जिसमे एक खबर चली कि जेएनयू कैम्पस के अंदर जमकर भारत विरोधी नारे बाजी की गए,ब्राडकास्ट मीडिया ने इस खबर को कई एंगल देकर पेश किया ,मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है लेकिन इस खबर को बड़ा चडा कर पेश करने सबसे बड़ा हाथ रहा कुछ एसे न्यूज वेबसाईट का जिन्होंने बिना किसी आधार के ख़बरों को और मिर्च मसाला लगाकर पब्लिक के बीच पेश किया, नतीजा ये निकला कि भडकी हुई पब्लिक ने उन न्यूज वेबसाईट लिंक को लगातार ट्विट रीट्विट करके उनके व्यूज पॉइंट में इजाफा कर दिया.

एसी ही एक न्यूज वेबसाईट दैनिक भारत डाट ओआरजी ने जेएनयू के ऊपर बिना किसी आधार की खबर बना दी कि हर साल एक निश्चित दिन पर जेएनयू में भारत विरोधी एक आन्दोलन चलता है. टीवी की ख़बरों ने जहाँ जेएनयू के मुद्दे पर आग लगा रखी थी वहीं इस खबर ने उस आग में घी का काम कर दिया और लगभग सभी जगह ये लिंक शेयर किया जाने लगा,उस समय इसकी देखा देखी बहुत से कंटेंट जनरेटर ने व्यूज के लालच में इस खबर को रीराईट किया,अपने अपने कथित न्यूज पोर्टल्स में लगाया. नतीजा यह निकला कि जेएनयू जो अब तक सिर्फ शक के घेरे में था उसके बाद भारत विरोधी गतिविधी के लिए सोशल मीडिया जजों द्वारा घोषित देश विरोधी कालेज हो गया. सबूत के तौर पर ये सभी लिंक पेश किये जाने लगे.

जारी है ……………………………….

नोट-लेख को ‘डिजिटल मीडिया और फर्जी खबरों का बड़ता दायरा’ नाम के रिसर्च पेपर से लिया गया है.आगे और भी अंश प्रकाशित किये जायेंगे.

पिछले फर्जी खबरों वाले अध्याय यहाँ मिलेंगे

फर्जी खबरों का मकडजाल और पत्रकारिता भाग 3

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