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देशभक्ती का ढोंग है लेटेस्ट फैशन

मार्च 1, 2017 ओये बांगड़ू

गिरीश लोहनी बता रहे हैं देशभक्ती का लेटेस्ट ट्रेंड 

भारत में इन दिनों न्यूनतम शब्दों में खुद को देशभक्त और दूसरे को देशद्रोही प्रमाणित करने का फैशन जोरों पर है।पिक्चर हाल में राष्ट्रगान बजा देशभक्ति के इंजेक्शन पहले ही जारी कर दिये हैं।देशभक्ति मापने का पैमाना क्या है? बड़े गूणज्ञान का विषय है।अगर आप किसी समुदाय विशेष से हो तो आपकी दाढी देशभक्ति के नंबर घटा सकती है। वही आपके सिर की शिखा ( सर पर बालो का एन्टीना टाइप ) देशभक्ति के नबंर स्पीड से कैच करने की पूरी संभावना रखती है। देशभक्ति के फंडे ने आज सदियों से हाशिये में रहे गधों तक को मेन स्ट्रीम पर ला दिया है। कन्फ्यूज हूं कहीं स्कूल का मास्टर भी जब मुझे गधा कहकर कक्षा से बाहर लताड़ता था तो कही मेरी अतिरिक्त वाली क्षमता के कारण तो नहीं था। इस बीच खबर है कि गुजरात शिशु लिंग अनुपात में अव्वल आ चुका है इसलिए अब पूरा फोकस गधों पर रहेगा।
कोई बल्लेबाजी के रिकॉर्ड से, कोई कुश्ती के अखाडे से, कोई पिता के शहीद होने से, कोई बेटे के शहीद होने से अपने आप को देशभक्त बाकि को देशद्रोही बनाने पर तुला हुआ है। फौजी का योगदान गिनाने वाली यह जनता राष्ट्र निर्माण में सहयोग के लिये बेटे की खोज में तीन से चार बच्चों का एवरेज रखती है। फौजी के पीछे उसके भरे पूरे परिवार की याद इन्हें उसके शहीद होने पर ही आती है।वो भी आजकल कैमरे की चम-चुम पर निर्भर करता है कि याद कितने दिन रहेगी।एक परिवार के सदस्य को खोने का दुख एक शहर की देशभक्ति के दबाव में छोटा पड जाता है।एक पत्नी की जिन्दगी का बडा हिस्सा किसी अनहोनी की खबर के डर में कट जाता है पर पत्नी का डर देशद्रोही करार दिये जाने के खौफ के कारण कहीं गुम हो जाता है। एक फौजी का बच्चा अपनी जिन्दगी का सबसे नाजुक एक चौथाई हिस्सा बिना बाप के गुजारता है। देशभक्ति की परिभाषा में इस बलिदान के कितने नंबर मिलेंगे जनता जाने। देशभक्ति का रंग कैसा होता है, बास कैसी होती है, आकार कैसा होता है जैसे शोध के विषयों से फुर्सत मिले तो कोई मुझे बताये कि जनसंख्या विस्फोट के दौर में आजीवन अविवाहित रहने पर देशभक्ति के कितने नंबर है मिलेंगे? कोई बताये हम दो हमारे दो के दौर में, हम दो हमारा एक वालों को भी कुछ देशभक्ति के कुछ नंबर मिलने चाहिए की नहीं।कान के नीचे देशभक्ति का डंडा दबा सड़क किनारे मूत की धार लगाने वालों के कितने नंबर कटते हैं। संसद न चलने देने वालों को देशभक्ति में फेल क्यों नहीं माना जाता।कब तक देशभक्ति के नंबर गाय की पूंछ से बधे रहेंगे।कब तक देशभक्ति मंदिर के घंटों और मस्जिदों के स्पीकर पर लटकी रहेगी। कब तक देशभक्ति के फुल नंबर केवल कानों को अच्छी लगनी वाली बातों को मिलते रहेंगे। पाकिस्तान हमारा दुश्मन का राग कब तक देशभक्ति में फुल बट्टा फुल नंबर लायेगा।पाकिस्तान हमारा दुश्मन के नंबर तो फुल हैं लेकिन पाकिस्तान को भारत द्वारा आतंकी राष्ट्र घोषित करने वाले बिल को जीरो नंबर है।देशभक्ति की स्याही से मोस्ट फेवरड नेसन की भारतीय लिस्ट में पाकिस्तान का नाम काटा क्यों नहीं जाता? कुल मिलाकर देशभक्ति एक भावनात्मक छद्म है जिससे कोई भी कभी भी खेल जाता है, अपने अपने नियमों के साथ।

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