यंगिस्तान

डिप्रेशन – दोबारा पूछो

अप्रैल 22, 2017 कमल पंत

डिप्रेशन एक एसी बीमारी है जिसे हम जब तक अच्छी तरह समझ पाते हैं तब तक वो विकराल रूप ले लेती है. वैसे डाक्टरी भाषा में इसके लक्ष्ण बडे आसान से बता दिए गए हैं कि सामन्य व्यवहार से बदला व्यवहार करे वगेरह वगेरह . तो डिप्रेशन है समझ लो.

लेकिन इन सबके अलावा वो क्या चीज है जो डिप्रेशन बन जाती है ? कोइ घटना बात दिल में दबी छिपी रह जाती है ना , बस वही आदमी को घोटती रहती है. जिन्दगी में 50 तरह की परेशानियां होती हैं, कई बार हम बोल कर मन हल्का कर लेते हैं और कई बार आस पास सुनने के लिए कोइ नहीं होता. जब सुनने के लिए कोइ नहीं होता तो धीरे धीरे मन में वह भावना या बात किसी कोने में जाकर सो जाती है. बेहोश नहीं होती सिर्फ सोती है. जब मन के कोने में वह भावना दोबारा जागती है तो डाक्टर कह देते हैं डिप्रेशन है.

मन हल्का करें , अक्सर कुछ बातें हम बताना तो चाहते हैं लेकिन बता नहीं पाते, और जब बता नहीं पाते तो मिसबिहेव करते हैं. यही मिसबिहेव आगे चलकर डिप्रेशन सिम्पटम बनता है. क्यों ना लोगों को इसके बारे में जगाएं , बताएं कि अपने आस पास के लोगों की सुनो, अपने करीबी लोगों को सुनने की आदत डालो.

इसको लेकर एक वीडिओ भी देखा मैंने कल यूट्यूब पर , आप भी देखिये. जानकारी के लिए बहुत अच्छा है.

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