यंगिस्तान

डियर भुला

जुलाई 7, 2017 Girish Lohni

“ सरकार अभी हनीमून पर है असुविधा के मौज लें ” वाले बोर्ड के पीछे दाहिने तरफ एक चिट्ठी मिली है. किसने किसको लिखी है भगवान जाने. जिसे अधिक जिज्ञासा हो गंत कर आये बाकि पढ़कर ही आनन्द लें.

डियर गोरखपुरी भुला अज्जु,

भुला, तुम हमें भूल गये पर तेरा ये भैजी तुझे नहीं भूला. हम दोनों साथ में राज-प्रमुख बने पर टीवी अखबार में तू ही छाया रहा. थोड़ी खुरस्यानी जैसी लगी तो मैं हनीमून पर चला गया. सोचा था आकर थोड़ा रौला करूँगा लेकिन टीवी-अखबार देखा तो तू और तेरे मंत्री हैं कि मेरा नम्बर ही नहीं पड़ने दे रे.

देख भुला हम ठैरे देहरादून वाले खाल्ली पहाड़ी-पहाड़ी करके बदनाम हुये. आग लगे उन पहाड़ों में या बज्जर पड़े हमें क्या मल्लब. लेकिन भुला अब मैदान में भी घिचिर-पिचिर हो जायेगी तो मेरे मंत्री-संत्री भी बौलियेंगे ही. बौलियेंगे क्या बौलिने के नाटक तो करना पड़ेगा.

देख भुला हम कितना देहरादून-हल्दवानी वाला कर लें पर अंदर से ठैरे हम पहाड़ी ही. भोले हुये हम. जमीन-जायदात की वैसे ही समझ नहीं हुई. जहां बड़ों ने लगाया उसी रास्ते हिट दिये हम. हमारे पूर्वजों ने हरद्वार की बढिया जमीन तुम्हारे नाम करी ठैरी, खाल्ली मेले का आयोजन अपने लिये रखा, नहरों के भी हमने खाल्ली पुछौड़-पुछौड़ रखे हुए.

तब की बात अलग हुई. अब सत्रह साल बाद ये फेसबुक कट्ठू के कारण मैदान का आदमी वो सब देख लेता है जो टीवी में दिखाते हैं. टीवी में आने के चक्कर में तुम्हारे मंत्री अनाप-सनाप बक देते हैं और ये मैदान वाले देख लेते हैं.

देख भुला मेरी तो कोई तय्यारी नहीं है फिर भी इस महिने की चौबीस तारीख मिलने का दिन निकाला है. पहले तो भुला मिल देना दुसरा तब तक अपने मंत्री लोगों को चुप रहने को कह देना थोड़ा. मेरा हनीमून ढ़ाई साल तो पक्का है किसी ने कुमाऊं-गढ़वाल का रौला नहीं काटा तो चार पक्के ही समझो. फिर पाँचवें साल पहाड़ों में बढिया वाली जागर लगा दूँगा. खाल्लीं अभी से काम नी बड़ाओ हो.

बाकि एक डब्बा घी गाँव से मंगा रखा है रोड ब्लाक नहीं हुई तो आ जायेगा. अब फल वगौरा होते नहीं पहाड़ में. ये साल तो सुना है आधे बेमौसम बारिश ने झड़ा दिये बचे हुये गुन-बानर ने खा दिये. मडु से तो काले हो जाने वाले ठैरे वो खाल्ली नी बोकुंगा.

भुला अब तेरे भैजी कि इज्जत तेरे हाथों में है मेरे बस की तो कुछ नहीं. मंत्री-संत्री भी मेरे जैसे हु़ए. अब तुम देख लो भुला. बाकि पहाड़ का ऐसा ही ठैरा तुम मैदान का देख लो बस.

देहारदून से तुम्हार भैजी

“ तिल्लू ”

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