बांगड़ूनामा

दबी जुबानें

दिसंबर 5, 2017 ओये बांगड़ू

‘अब क्या हुआ ? ये अचानक से मूड क्यों बदल गया . इतने टाईम बाद मिला हूँ कम से कम मिलकर ढंग से हाई हेलो कर लो.’
कृष्णा और विजय बहुत अच्छे दोस्त थे,रोजाना मिलना नहीं हो पाता था मगर फिर भी जब भी एक शहर में होते तो मिल लेते. अच्छे दोस्त थे. एक दुसरे के हर सुख में दुःख में शामिल, खुद भी नए दौर की चीजों को आपसी समझ से समझने की कोशिश कर रहे थे. सहारा थे एक दुसरे का. बस एक लडका था दूसरी लडकी . सेम जेंडर के नहीं थे यही एक दिक्कत थी.

अक्सर अपोजिट जेंडर वाली थ्योरी इन पर भी काम करने लग जाती और फिर ‘मैंने प्यार किया ‘ फिल्म के उस डायलोग की तरह दोनों मान लेते कि ‘यस लड़का लडकी कभी दोस्त नहीं हो सकते ‘

कृष्णा विजय के इस बार के झगड़े में थोड़ी सी सीरियसनेस थी, जाने क्यों इस बार लग रहा था कि बात का बतंगड बनने जा रहा है जो बात ही कुछ न थी. दोनों की बोलचाल बंद थी. पता नहीं क्यों माहौल ही कुछ एसा था कि एक शहर में होते हुए भी दोनों को एक दुसरे का टाईम नहीं मिल पा रहा था.

एक सहारा सा होता था जब लगता था कि दोनों एक दुसरे के साथ हैं, मालूम रहता था कि एक नहीं तो दूसरा चीजों को संभाल लेगा, लेकिन इस वख्त सभी चीजें संभलती नहीं दिख रही थी एक के बाद एक गडबड हुए जा रही थी.

गाजियाबाद के गांवों में वैसे भी जब एक लडका लडकी एक साथ घुमते फिरते दिखाई दें तो लोगों की जुबाने खुलने लगती है, कृष्णा विजय को इससे फर्क नहीं पड़ता था लेकिन इस बार जब कृष्णा से किसी ने इस मामले में कुछ कह दिया तो उसने विजय के आते ही सारा गुस्सा उस पर उतार दिया. और नतीजा ये निकला कि आस पास उनके साथ से जलने वालों लोगों की मौज हो गयी.

एक ओर जहाँ कृष्णा विजय से मिलने वाले लोग मजाक मजाक में दोनों की खिचाई कर रहे थे वहीं दूसरी ओर दबी जुबान में दोनों के अलग होने पर मजे भी ले रहे थे.

कृष्णा इस बार अपने गुस्से पर अटल थी वहीं विजय को गाँवों के कामों से फुर्सत नहीं मिल रही थी, लम्बे टाईम बाद वो गाँव आया था इसलिए घर का काफी काम उसके सर पर था. वहीं कृष्णा को लग रहा था कि गाँवों की जुबाने जो उसके कान भर रही हैं वो एकदम सही कहती हैं .

गाँव की दबी जुबानों ने अपना काम कर दिया था, कहीं इन्हें कान भरने वाला तो कहीं भडकाने वाला कहा जाता है जो हर अच्छी चीज को खराब करने का माद्दा रखती हैं, पड़ोसी को पड़ोसी से झगड़ा करवा दें ये दबी जुबाने , पति को पत्नी के खिलाफ करवा दें ये दबी जुबाने , एक गाँव को दुसरे गाँव के खिलाफ कर दें ये दबी जुबाने, भाई को भाई के खिलाफ ,हिन्दू को मुस्लिम के खिलाफ कर दें ये दबी जुबानें. तो वो दो तो लडका लडकी थे, वो भी दोस्त. दबी जुबानों ने अपना काम कर दिया था. जैसे हर बार कर देती हैं .

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