यंगिस्तान

कबाड़ और जुगाड़ का मिश्रण

अप्रैल 22, 2017 Shivesh Jha

ई हई बिहारक रजधानी पटना। वैसे तो पटना गाँधी मैदान, बजरंगवली मंदिर, गोलाम्बर, लालू यादव इत्यादि बहुतो चीज के लिए फेमस है, परन्तु आजकल हियाँ चर्चा का विषय है ‘एनर्जी कैफै।’ आजकल ई कैफे खास तौर पर लोकप्रियता बटोर रहा है। कारण भी ऐसा कि का बताबे? ई कैफे का निर्माण शानदार कंसेप्ट और बेहतरीन वेस्ट मैनेजमेंट के साथ किया गया। इस कैफे की खासियत ही लोगों को लुभाने के लिए काफी है। बिहारके विद्युत विभाग के मुख्यालय मे बने इस कैफे का नाम ही ‘एनर्जी कैफै’ है। इसका पहला कारण तो ई है कि यह उर्जा विभाग के दफ्तर में हैं और दोसरा ई कि एकरा थीम एनर्जी बेस है। इसको बिजली निर्माण के चीजों से बनाया गया है।

ई कैफे का सबसे खास बात ई है कि, यह विद्युत विभाग के फर्नीचर समेत इंटीरियर डिजाइनिंग में उपयोग में लाये गये सारे सामान तथा कबाड़ से बनाया गया है। कबाड़ को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाकर इसका नाम ‘एनर्जी कैफे’ दिया गया। इसके निर्माण का इतना अच्छा आइडिया बिहार के आईएएस और तब विभाग के सीएमडी रहे प्रत्यय अमृत का था, इसका डिजाइन करने वाले प्रोफेशनल आर्टिस्ट मंजीत और नेहा सिंह हैं।

दोनों डिजाइनर के अनुसार कबाड़ की इन चीजों को फिर से आकर्षक बनाना बेहद मुश्किल था लेकिन धीरे-धीरे हमने चीजों को नया रूप दिया। इसके बाद तो इलेक्ट्रिक पैनल्स से टेबल और बेंच बनाए गए तो इंसुलेटर भी काम आ गये। ट्रांसफार्मर के आयल ड्रम से बैठने का टूल तैयार किया। इंसुलेटर से डस्टबीन और बिजली के तार से मॉडर्न आर्ट बनाया।

इस एनर्जी कैफे का सबसे बड़ा आकर्षण है एक सोफा। यह सोफा लोगों को अपनी ओर खास आकर्षित करता है। इसे बनाने के लिए पुरानी एंबेसेडर कार को आधा काट कर उसे सोफामे बदल दिया गया और उसमें गद्दे लगा दिए गये। बताया जाता है कि यह कार कभी बिहार राज्य बिजली बोर्ड के अध्यक्ष की सरकारी गाड़ी हुआ करती थी।

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