बांगड़ूनामा

सिगरेट – अमृता प्रीतम

अक्टूबर 16, 2018 ओये बांगड़ू

यह आग की बात है

तूने यह बात सुनाई है

यह ज़िंदगी की वो ही सिगरेट है

जो तूने कभी सुलगाई थी

 

चिंगारी तूने दे थी

यह दिल सदा जलता रहा

वक़्त कलम पकड़ कर

कोई हिसाब लिखता रहा

 

चौदह मिनिट हुए हैं

इसका ख़ाता देखो

चौदह साल ही हैं

इस कलम से पूछो

 

मेरे इस जिस्म में

तेरा साँस चलता रहा

धरती गवाही देगी

धुआं निकलता रहा

 

उमर की सिगरेट जल गयी

मेरे इश्के की महक

कुछ तेरी सान्सों में

कुछ हवा में मिल गयी,

 

देखो यह आखरी टुकड़ा है

ऊँगलीयों में से छोड़ दो

कही मेरे इश्कुए की आँच

तुम्हारी ऊँगली ना छू ले

 

ज़िंदगी का अब गम नही

इस आग को संभाल ले

तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ

अब और सिगरेट जला ले !

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