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चुनावी साल में ही सही मगर कुछ खुलासे तो हुए

फरवरी 9, 2019 कमल पंत

कल पूरा दिन एन राम की द हिन्दू वाली खबर का पोस्टमार्टम चलता रहा,सरकारी आदमी और सपोर्टर अपना पक्ष रखते रहे और विपक्ष और विरोधी आदमी अपना पक्ष.जाहिर है चुनावी वर्ष है एसे एक्सक्लूसिव खुलासे होने चाहिए और हो भी रहे हैं तभी तो लगता है कि लोकतंत्र अभी ज़िंदा घूम रहा है.जिस राफेल पर समस्त सोशल मीडिया समाज और समर्थक दलों ने राहुल गांधी को पप्पू साबित कर दिया था,उसी राफेल की सरकारी फाईलें खोल कर एन राम ने बड़ा खुलासा कर दिया.

राफेल पर घोटाले की बू पहले से ही आ रही थी,पर सबूत के नाम पर बड़ी चीज कोइ पास में नहीं थी,सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया था कि किसी भी तरह के दामों को लेकर वह इंटरफेयर नहीं करेगा ये उसके कार्यक्षेत्र में नहीं आता. सही भी है,सरकार को कब क्या और कितने में खरीदना चाहिए ये कोर्ट थोड़ी न बतायेगा,ये तो सरकार का कार्यक्षेत्र है. लेकिन सरकार जब उस चीज को देशहित के नाम पर सस्ते के बदले महंगा खरीदती है तो शक होना जायज है और हुआ भी.

एन राम ने रक्षा मंत्रालय का एक पत्र सामने रख दिया,जिसमे काफी सारे सवाल मुंह बांचे खड़े थे.सोचनीय है कि आखिर क्यों पीएमओ बीच में आया,जब रक्षा मंत्रालय के लोग सौदा पटा रहे हैं तो पीएमओ के बीच में आने का क्या लाजिक बनता है,बिना किसी अनुभव के अनिल अम्बानी को सौदा देने का क्या लाजिक बनता है.

अभी फ़्रांस ने इसी राफेल के नए जहाजों को पांच सौ कुछ करोड़ में खरीदा है तो हम इसके एक पुराने वर्जन को 16०० करोड़ में खरीद रहे हैं क्या लाजिक बनता है ? एसे सवाल पूछे जाने चाहिए.चलो चुनावी साल में ही सही लेकिन ये सवाल खुल कर सरकार से पूछे गए इस बात की खुशी है.

देशहित देशप्रेम के नाम पर आप कुछ भी नहीं कर सकते,देशहित को एक तरह का टैग बना दिया है,मतलब कुछ भी करो,उसके ऊपर टैग लगा दो,देश प्रेम या देश हित. हर चीज जायज हो जायेगी.

 

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