ओए न्यूज़

चना चटपटा- किस्त नब्बे के दशक की कहानीयों की

नवंबर 25, 2017 ओये बांगड़ू

अमेजन के बाजार में आया है चना चटपटा. गडबडाईये नहीं चना चटपटा खाने का माल नहीं खो जाने वाला माल है, डूब जाने वाला माल है. नब्बे के दशक की कहानीयों की किस्त है चना चटपट. “चना चटपटापिथौरागढ़ कथा” अपने चंकी महाराज की नयी किताब का नाम है.

दुनियाँ जहान में घाट-घाट का पानी पीने के बाद चंकी महाराज को याद आयी अपने गृह नगर पिथौरागढ़ कि और लिख डाली किताब चना चटपटा. क्या आपने नब्बे के दशक में कभी पियार किया है? क्या कभी आपकी प्रेमिका ने आपके और अपने नाम का पहला अक्षर रूमाल पर लिखकर आपको दिया है? क्या आपने कभी ग्रीटिंग कार्ड के जरिये अपने प्यार का इजहार किया है? क्या आपको कभी गुमनाम आशिको की चिट्ठियां मिली हैं? क्या आपने कभी गली में ढोलकी वाले की तान पर अपने सुर साधने की कोशिश की है? क्या आपने कभी कोचिंग के बाहर किसी के इंतजार में घन्टो पलक झपकते गुजारे हैं?

क्या आपने कभी आशिकी में अपने कोड बनाकर दुनिया की भाषा से अलग अपनी ही एक भाषा बनाई है? क्या आपने कभी भूत, प्रेत या छल के नाम पर मौहल्ले की लड़की पर चांस मारा है? चौराहे पर खड़े होकर घुच्ची का सचिन तेन्दुल्कर बन आप किसी के दिल के हीरो बने हैं? क्या आपने कालेज के दिनों में निक्म्मी राजनीति की है? क्या आपने कभी पाँच रुपये की मधु आईसक्रीम किसी के साथ शेयर की है? क्या आप कभी मोहल्ले के किसी अफवाह एक्सपर्ट के शिकार हुये हैं?

इनके अलावा यदि आपकी पैदाइश पिथौरागढ़ है और आप पिथौरागढ़ में पले बड़े हैं तो चना चटपटा आपके स्कूल कालेज के दिनों की याद ताजा करने वाली वो किताब है जिसे चंकी महाराज ने हजारों गलियाँ खाकर चना चटपट के रुप में पेश किया है.

कुल मिलाकर अगर आप नब्बे के उस दौर में खो जाना चाहते हैं जब शक्तिमान हमारा हीरो था, जब रविवार चार बजे मतलब सिनेमा था. तो चंकी महाराज की चना चटपटा आपके लिये तैयार हैं.

किताब यहां से खरीदें

https://www.amazon.in/dp/9386452596/ref=cm_sw_r_wa_awdo_72TeAb6JGJMCR

2 thoughts on “चना चटपटा- किस्त नब्बे के दशक की कहानीयों की”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *