गंभीर अड्डा

चेहरे ने बदल दी पहचान

अप्रैल 9, 2019 ओये बांगड़ू

 

“उसने मेरा चेहरा बदला है दिल नहीं, उसने मेरे चेहरे पर एसिड डाला है मेरे सपनों पर नहीं”
– लक्ष्मी अग्रवाल

चेहरा हमारी खुबसूरती का पैमाना माना जाता है और यही चेहरा कोई हमसे छीन ले.सोच कर भी डर लगता है. हमारे समाज में या किसी भी देश में लड़कियों की खुबसूरती बहुत मायने रखती है. ऐसी ही एक लड़की जिसने अपनी खुबसूरती को बहुत छोटी उम्र में ही खो दिया, पर हिम्मत नहीं हारी, यह बहादुर लड़की है लक्ष्मी अग्रवाल जिसे आज किसी परिचय की जरुरत नहीं.

यह बात 2005 की है जब लक्ष्मी सिर्फ 15 साल की थी तब उसके पड़ोस में रहने वाला 32 साल के आदमी ने उसे शादी का प्रस्ताव रखा पर जब उस लड़की ने मना कर दिया तब उस आदमी ने लक्ष्मी को परेशान करना शुरु कर दिया और रोज़ उसका पीछा करने लगा. जब बात ना बनी तब उस आदमी ने लक्ष्मी पर एसिड डलवा दिया. उस समय उसने वो सहा जो किसी की भी अंतर आत्मा को झकझोर कर रख दें. यह कहानी उस लड़की की है जिसके सपनों को कुचलने की कोशिश की गई पर अपनी हिम्मत से वो वापस उठ खड़ी हुई.

दिल्ली की रहने वाली एक मामूली लड़की की जिन्दगी ख़ान मार्केट में पूरी तरह से बदल गई और उसकी आगे की जिन्दगी संघर्ष और दुख से भर गई. सबसे दुख की बात यह है की उस लड़की की जिन्दगी खराब करने वाली भी एक लड़की ही थी. वो सड़क पर दर्द से तड़पती रही और लोग तमाशबीन बनकर देखते रहे, यह व्यवहार हमारे समाज की इंसानियत पर सवाल उठाता है. पर सब लोग एक जैसे नहीं होते. उस भीड़ में भी एक ऐसा इंसान था जिसने उस लड़की की मदद की और उसे अस्पताल पहुंचाया. लक्ष्मी का चेहरा पूरी तरह से खराब हो चुका था, उसकी दोनों आखें बाहर आ चुकी थी. वो अपना चेहरा देखना चाहती थी पर उसका चेहरा इतना खराब हो चुका था कि उसके घर वालों ने उसे अपना चेहरा देखने नहीं दिया.

अपने दर्द से तड़पती लक्ष्मी को समाज से भी निराशा ही मिली, लोगो को उसके दर्द की नहीं उसकी शादी की चिंता थी. लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और अपनी बिखरी जिन्दगी को शिक्षा के द्वारा फिर से समेटने की कोशिश की. धीरे-धीरे जिन्दगी पटरी पर अभी आई ही थी कि 2012 में उसके पिता की मृत्यु हो गई. अब परिवार को चलाने की जिम्मेदारी लक्ष्मी पर थी. जहां लोग चहरे को खुबसूरती का पैमाना मानते है वहीं आलोक दिक्षित जैसे व्यक्ति ने लक्ष्मी के दिल की खुबसूरती को समझा और उसे अपनाया.

आज लक्ष्मी अपने जैसी कई लड़कियों की एक NGO #stopacidattack के द्वारा मदद कर रही है.

इसी बहादुर लड़की की कहानी लोगो के सामने लाने के लिए छपाक नाम की फिल्म डाइरेक्टर मेघना गुलजार हम सभी के सामने 10 जनवरी 2020 को लेकर आऐंगी और इस में मुख्य भूमिका में दीपिका पादुकोण नजर आऐंगी.

मिडिया स्टूडेंट पारुल वीनस और दृष्टि द्वारा लिखा यह लेख लक्ष्मी अग्रवाल द्वारा टेड टॉक्स में कही गई उनकी बातों पर आधारित है

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