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CBI विवाद: SC ने CVC को जांच के लिए दिए 2 हफ्ते, नागेश्वर की पॉवर पर लगी पाबन्दी

अक्टूबर 26, 2018 ओये बांगड़ू

देश में ऐसा पहली बार हुआ कि सीबीआई में घमासान मचा. सीबीआई के हेड ने  सेकेंड हैड पर आरोप लगाए और सेकेंड हेड पहले पर आरोपों की बोछार कर दी. एक कहता तू बेईमान दूसरा कहता तू बेईमान. इन सब के बीच सरकार (CVC) कहती यहां मत लड़ो रे छुट्टी पर चले जाओ. सरकार ने CBI का सारा काम धाम देखने का जिम्मा अंतरिम डायरेक्टर की नियुक्ति कर एम नागेश्वर राव के कन्धों पर डाल दिया.

लेकिन छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा  जबरदस्ती छुट्टी पर भेजे जाने की याचिका लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और उनके पीछे पीछे राकेश अस्थाना भी पहुंच गए और अलोक वर्मा पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया. लेकिन आज 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और एक एनजीओ द्वारा दाखिल याचिका पर ही हुई.

आज सीबीआई से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल एवं जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने की.चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि वह इस मामले को देखेंगे, उन्होंने सीवीसी से अपनी जांच अगले 2 हफ्ते में पूरी करने को कहा है, पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एके पटनायक की निगरानी में होगी. चीफ जस्टिस ने कहा कि देशहित में इस मामले को ज्यादा लंबा नहीं खींच सकते हैं.

CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा की याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है. उन्होंने सरकार से पूछा है कि किस आधार पर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा गया है. SC ने अंतरिम डायरेक्टर नागेश्वर राव की पॉवर पर भी पाबंदी लगा दी. चीफ जस्टिस ने कहा है कि वह कोई नीतिगत फैसला नहीं कर सकते हैं. वह सिर्फ रूटीन कामकाज ही देखेंगे.साथ ही 23 अक्टूबर से अब तक जो भी फैसले लिए गए है उन्हें भी सील बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपना होगा.देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी से जुड़े इस मामले में अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी.

गौरतलब है कि CBI के इस मामले में नंबर एक अलोक वर्मा और नंबर दो राकेश अस्थाना  दोनो ही कोई हल्के फुल्के आदमी नही हैं. दोनो ने अपनी अपनी जगह अपने अपने टाइम पर गुजरात दंगों से लेकर अन्य सीबीआई मामलो में पूरी ईमानदारी से काम किया है. सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा जो हैं पहले दिल्ली के कमिश्नर हुआ करते थे, सबने सोचा रिटायर होकर घर जाएंगे बाद में राज्यपाल बन जाएंगे, मगर मोदी जी ने उन्हें सीबीआई निदेशक पद दे दिया. राकेश अस्थाना सीबीआई सह निदेशक होते थे, कार्यकारी निदेशक बने तो सबने सोचा निदेशक बन जाएंगे. मगर उन्हें स्पेशल निदेशक बना दिया, मतलब दूसरा नम्बर वाला.

इन सब के बीच मोईन खान सामने आ गया (या लाया गया)। ये करेक्टर एक मामले में 5 करोड़ की घूस किश्तों में दे रहा था। मतलब थोड़ा थोड़ा करके। तो जब ये 3 करोड़ से ऊपर दे चुका था तो इसका ईमान जाग गया और इसने चिट्ठी लिख दी सीबीआई निदेशक को, अब ये खुद सामने आया या आलोक वर्मा इसे लेकर आये वो बहस का विषय हो सकता है. खैर इसकी चिट्ठी पर खूब हंगामा बरपा. अब सीबीआई की साख सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी है.

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